1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. ‘कॉकरोचों’ के सामने ढीले पड़े BCI अध्यक्ष और भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा के तेवर, बोले- जो दीपके जी चाहते हैं…

‘कॉकरोचों’ के सामने ढीले पड़े BCI अध्यक्ष और भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा के तेवर, बोले- जो दीपके जी चाहते हैं…

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) अध्यक्ष व भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा (BJP Rajya Sabha MP Manan Mishra) ने अपने एक आदेश को लेकर फिर से सफाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Founder Abhijeet Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) के आरोपों पर भी जवाब दिया है।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) अध्यक्ष व भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा (BJP Rajya Sabha MP Manan Mishra) ने अपने एक आदेश को लेकर फिर से सफाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Founder Abhijeet Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) के आरोपों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि दीपके और दास की तरह वे भी छात्रों के हितों पर ध्यान देते हैं। बीसीआई (BCI)  ने हैदराबाद की नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के सभी छात्रों के एडवोकेट के रूप में नामांकन पर रोक लगा दी थी। आदेश में कहा गया था कि छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत (Chief Justice of India Surya Kant) को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया था। सीजेपी (CJP) ने इसका कड़ा विरोध किया था। अब यह आदेश कुछ ही घंटों में वापस हो गया है।

पढ़ें :- सीजेपी ने कई अहम पदों पर नए नामों का किया ऐलान, पार्टी ने दो नए राष्ट्रीय प्रवक्ता भी नियुक्त किए

अब मनन मिश्रा क्या दे रहे हैं सफाई?

इस पर सफाई देते हुए मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं सीजेपी से भी बात करूंगा। मैं बात करने से नहीं कतराता हूं। जो बातें हैं उसको मैं एक्सप्लेन करूंगा। छात्रों के हितों को नुकसान न पहुंचे इसके लिए जो निर्णय हुआ उसे तुरंत वापस ले लिया गया। काउंसिल ने उसे अप्रूव नहीं किया। अभिजीत दीपके जी हों… सौरव दास जी हों… उनको मैं बताना चाहता हूं कि छात्रों के हितों में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। छात्रों के हितों की रक्षा के लिए मैं… बार काउंसिल ऑफ इंडिया और इसके सदस्य हैं। कम्यूनिकेशन में कहीं कोई दिक्कत हुई है तो मैं क्लियर करना चाहता हूं कि छात्रों का हित ही हमारे लिए सर्वोपरि है। जो अभिजीत दीपके जी चाहते हैं… युवाओं के हितों की रक्षा करना, वही हमारा भी उद्देश्य है।’

सीजेपी ने बोला तीखा हमला

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष और भाजपा राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा पर शुक्रवार को तीखा हमला बोलते हुए सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास (Sourav Das)  ने बीसीआई (BCI) के खर्चों पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर जवाबदेही की मांग की। सीजेपी ने इस घटनाक्रम को युवाओं की जीत बताया। प्रवक्ता सौरव दास (Sourav Das)  ने लिखा कि हो गया भाई। युवाओं की एक और बड़ी जीत! लेकिन जवाबदेही की लड़ाई जारी रहेगी।

पढ़ें :- Aravalli Row : अरावली मामले पर सुप्रीम कोर्ट में फिर करेगा सुनवाई? पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील हितेंद्र गांधी ने CJI और राष्ट्रपति को लिखा पत्र

उन्होंने बीसीआई के आधिकारिक ऑडिटेड आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में गतिविधियों और बैठकों पर करीब 14.22 करोड़ रुपये खर्च हुए। दास ने सवाल किया कि मिश्रा 2012 से इस पद पर हैं और युवा वकीलों तथा लॉ स्कूलों के कल्याण के लिए क्या किया गया। उन्होंने मिश्रा के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अब उनका समय खत्म हो गया है।

आरोपों पर क्या बोले मनन मिश्रा?

खर्चों के आरोपों पर सफाई देते हुए मनन मिश्रा ने कहा कि 14 करोड़ वाली बात मुझे नहीं पता। कुछ सेमीनार होते हैं… बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी विषय पर ये सेमीनार करती है। 14 करोड़ कहां खर्च हुए ये मुझे नहीं पता? लेकिन बात ये कि कहीं कोई कम्युनिकशन गैप है तो सौरव दास जी हों.. दीपके जी हों.. उन लोगों से बात करके अगर कुछ एक्सप्लेन करना है वो किया जा सकता है।

आखिर क्या है विवाद?

विवाद गुरुवार (13 अगस्त) को शुरू हुआ जब बीसीआई ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि नालसर के 2026 बैच के किसी भी छात्र को एडवोकेट के रूप में नामांकित न किया जाए। आदेश का आधार कुछ छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध था। मिश्रा के आदेश में कहा गया था कि जो छात्र देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का सम्मान नहीं करते, वे जिम्मेदार अधिवक्ता नहीं बन सकते। विश्वविद्यालय से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट और शामिल छात्रों के नाम भी मांगे गए थे।

आदेश जारी होने के कुछ घंटों के अंदर ही व्यापक विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद बीसीआई को पीछे हटना पड़ा। पहले आंशिक संशोधन किया गया कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और उन्हें नामांकन की अनुमति दी जाएगी, जबकि जांच जारी रहेगी। देर रात मिश्रा ने एक्स पर पोस्ट कर घोषणा की कि 2026 बैच के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सीनियर एडवोकेट्स, बार सदस्यों, लॉ छात्रों और नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बाद बीसीआई इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि छात्रों की किसी गड़बड़ी या आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी। मिश्रा ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी राय स्वतंत्र रूप से व्यक्त करें, लेकिन सम्मान और संस्थागत मर्यादा के साथ।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...