देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) पर बैठे हैं। इस वजह से उनकी हालत लगातार नाजुक हो रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी जारी की है, अगर ऐसा ही रहा तो उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देंगे। लगातार गिरते स्वास्थ्य पर देश के नेता-अभिनेता समेत अनेक लोग उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए मना रहे हैं।
नई दिल्ली। देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) पर बैठे हैं। इस वजह से उनकी हालत लगातार नाजुक हो रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी जारी की है, अगर ऐसा ही रहा तो उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देंगे। लगातार गिरते स्वास्थ्य पर देश के नेता-अभिनेता समेत अनेक लोग उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए मना रहे हैं। इसी बीच बॉलीबुड की दबंग गर्ल एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा- कि बहुत सारे लोग चुप हैं। मुझसे तो रहा नहीं जा रहा है। अब जो होना है होगा, नो प्रॉब्लम, लेकिन मैं चुप नहीं बैठ सकती…”। सोनाक्षी ने सरकार पर भी निशाना साधा। जानिए उन्होंने सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के समर्थन में क्या कुछ कहा?
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सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए सोनाक्षी (Sonakshi Sinha) ने कहा कि आज मुझसे रहा नहीं जा रहा है। सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के बारे में हम सब जानते हैं। आज वो 18 दिन से अनशन पर बैठे हैं। ये किसके लिए है- उन बच्चों के भविष्य के लिए बैठे हैं जो उन्हें दिख रहा है कि बर्बादी की तरफ जा रही है। ये उन बच्चों के लिए लड़ रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान दी। ये एक ऐसे सिस्टम के खिलाफ लड़ रहे हैं, जो सही से नहीं चल रहा है। आप जानते हैं, मैं जानती हूं, हम सब जानते हैं।
मैं कोई एंटी नेशनल नहीं हूं, तो मैं क्यों चुप रहूं?
आगे कहा कि कोई डायलॉग नहीं हो रहा। कोई बात नहीं कर रहा। मतलब इनकी तरफ कोई मुड़कर देख भी नहीं रहा है। इसलिए मैंने तय किया है कि मैं क्यों चुप रहूं? मैं भी तो इस देश की नागरिक हूं। मैं भी इस देश का भला चाहती हूं। मैं कोई एंटी नेशनल नहीं हूं, तो मैं क्यों चुप रहूं? सोनम जी ने कहा- आप मुझसे मत कहिए कि मैं अपना उपवास तोडूं। आप लोग सरकार से कहिए कि आप बात क्यों नहीं कर रहे हैं। आप इसको तवज्जो क्यों नहीं दे रहे हैं।
मैं आपसे नहीं कहूंगी कि आप अपना उपवास तोड़ें…
आप सही हो सर, मैं आपसे नहीं कहूंगी कि आप अपना उपवास तोड़ें। मैं बस यही पूछना चाहती हूं कि यह कब पर्याप्त होगा? जब ये आदमी मर जाएंगे, तब आप उठेंगे? और वो किसकी जिम्मेदारी होगी। ये ठीक नहीं हो रहा है, जो हो रहा है। मुझे लगता है कि हमें तो अपनी आवाज उठानी चाहिए। हमें अपनी आंखें खोलनी चाहिए, कोई और खोले या न खोले। जय हिंद।