हाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से जुड़ा EVM विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसकी वजह बॉम्बे हाई कोर्ट का हालिया आदेश है, जिसमें चांदीवली सीट के चुनाव परिणाम को लेकर तकनीकी जांच कराने को कहा गया है। दरअसल, चांदीवली विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नसीम खान को शिवसेना (शिंदे गुट) के दिलीप लांडे ने करीब 20 हजार वोटों से हराया था...
बॉम्बे हाई कोर्ट : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से जुड़ा EVM विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसकी वजह बॉम्बे हाई कोर्ट का हालिया आदेश है, जिसमें चांदीवली सीट के चुनाव परिणाम को लेकर तकनीकी जांच कराने को कहा गया है। दरअसल, चांदीवली विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नसीम खान को शिवसेना (शिंदे गुट) के दिलीप लांडे ने करीब 20 हजार वोटों से हराया था। हार के बाद नसीम खान ने EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अब करीब डेढ़ साल बाद कोर्ट ने मामले में तकनीकी सत्यापन कराने का आदेश दिया है।
मुंबई में दो दिन चलेगी जांच प्रक्रिया
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 16 और 17 अप्रैल को मुंबई के बोरीवली में EVM और VVPAT मशीनों की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की मौजूदगी के साथ EVM बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच के दौरान मॉक पोलिंग कर EVM और VVPAT के परिणामों का मिलान किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि मशीनों में किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई।
कितनी मशीनों की होगी जांच?
निर्वाचन नियमों के मुताबिक किसी भी विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल हुई कुल EVM और VVPAT मशीनों के 5% तक की जांच की जा सकती है। चांदीवली सीट पर 400 बूथों पर 400 EVM और VVPAT मशीनों का इस्तेमाल हुआ था। ऐसे में 5% के हिसाब से कुल 20 मशीनों की जांच की जा रही है। ये मशीनें शिकायतकर्ता की ओर से सुझाए गए बूथों से चुनी गई हैं।
क्या है जांच की गाइडलाइन?
हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने EVM और VVPAT के माइक्रोकंट्रोलर (बर्न मेमोरी) के सत्यापन के लिए एक नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी की है। यह SOP सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत निर्वाचन आयोग के बाद लागू की गई है। इसके तहत चुनाव में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार लिखित अनुरोध देकर 5% तक मशीनों की जांच करा सकते हैं।
कैसे होती है जांच?
इस प्रक्रिया में हर चुनी गई मशीन पर करीब 1400 वोट तक का मॉक पोल कराया जाता है। इसके बाद EVM के परिणाम और VVPAT पर्चियों का मिलान किया जाता है। अगर दोनों के नतीजे पूरी तरह मेल खाते हैं, तो माना जाता है कि मशीन की बर्न मेमोरी में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई और EVM पूरी तरह सुरक्षित है। यह तकनीकी प्रक्रिया EVM बनाने वाली सरकारी कंपनियों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) द्वारा तैयार की गई है। अब सबकी नजर इस जांच के नतीजों पर टिकी है, क्योंकि इससे न सिर्फ चांदीवली सीट का विवाद प्रभावित होगा, बल्कि EVM की विश्वसनीयता को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस पर भी असर पड़ सकता है।