तेजस्वी यादव ने दावा किया कि यह उपचुनाव बैलेट पेपर से हुआ और नतीजा सबके सामने है। उन्होंने कहा कि आरजेडी प्रत्याशी सोनू राय ने भारी मतों से जीत दर्ज की, जबकि एनडीए को करारी हार झेलनी पड़ी। तेजस्वी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि बैलेट से मतदान होने पर असली जनमत सामने आता है...
MLC BY ELECTION: बिहार विधान परिषद उपचुनाव में आरजेडी की जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव काफी उत्साहित नजर आए। भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार सीट पर मिली जीत को उन्होंने जनता का भरोसा बताया और इसी बहाने एक बार फिर ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए। तेजस्वी ने कहा कि अगर देश में चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं, तो बीजेपी और एनडीए कहीं टिक नहीं पाएंगे।
बैलेट से चुनाव हुआ, इसलिए जीती RJD: तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि यह उपचुनाव बैलेट पेपर से हुआ और नतीजा सबके सामने है। उन्होंने कहा कि आरजेडी प्रत्याशी सोनू राय ने भारी मतों से जीत दर्ज की, जबकि एनडीए को करारी हार झेलनी पड़ी। तेजस्वी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि बैलेट से मतदान होने पर असली जनमत सामने आता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर पिछला बिहार विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर से हुआ होता, तो महागठबंधन को 150 से ज्यादा सीटें मिलतीं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों ने मशीनों के जरिए खेल किया और उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
“जब गिनती में इतना समय लगता है तो EVM क्यों?”
ईवीएम को लेकर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि मशीनों से वोटिंग के बावजूद मतगणना देर रात तक चलती रहती है। उनके मुताबिक जब नतीजे आने में उतना ही समय लग रहा है जितना पहले बैलेट पेपर में लगता था, तो फिर बैलेट सिस्टम में लौटने में दिक्कत क्या है। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर में प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी दिखाई देती है और जनता को भी भरोसा रहता है। तेजस्वी ने दोहराया कि बैलेट से चुनाव होने पर बीजेपी और एनडीए की सच्चाई सामने आ जाएगी।
JDU से छिनी सीट
भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार एमएलसी सीट पर हुए उपचुनाव में आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय ने जेडीयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को 350 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। यह सीट पहले जेडीयू के पास थी। पूर्व एमएलसी राधाचरण साह के विधायक बनने के बाद सीट खाली हुई थी, जिसके बाद उपचुनाव कराया गया। जेडीयू ने राधाचरण साह के बेटे कन्हैया प्रसाद को मैदान में उतारा था, लेकिन वह सीट बचाने में सफल नहीं हो सके।