सनातन धर्म में चतुर्मास को बहुत पवित्र माना जाता है। यह चार महीनों की वो अवधि है जिसमें जप,तप, पूजा, नियम और साधना का विशेष महत्व है।
Chaturmas 2026 : सनातन धर्म में चतुर्मास को बहुत पवित्र माना जाता है। यह चार महीनों की वो अवधि है जिसमें जप,तप, पूजा, नियम और साधना का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,इस पूरी अवधि में तामसिक भोजन ,लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, और बासी भोजन का सेवन पूरी तरह छोड़ देना चाहिए।
चतुर्मास हर साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी (प्रबोधनी एकादशी ) तक रहती है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशेष काल खण्ड में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और सृष्टि का सारा कार्यभार भोलेनाथ संभालते हैं। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई से लेकर 20 नवंबर तक रहने वाला है।
श्रावण (सावन): भगवान शिव की आराधना और हरी पत्तेदार सब्जियों के त्याग का महीना।
भाद्रपद (भादो): भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) और दही के त्याग का महीना।
आश्विन (क्वार): पितृ पक्ष, नवरात्रि और दूध के त्याग का महीना।
कार्तिक: दीपदान, तुलसी पूजा और दालों/द्विदलीय अनाज के त्याग का महीना।
मांगलिक कार्य निषेध
भगवान विष्णु के शयन काल में रहने के कारण विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ), नया गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ व मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं।