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चीन ने बनाया हवा से हवा में वार करने वाला हाइपरसोनिक हथियार, आसमान में दुश्मन के लिए बढ़ा खतरा

वैश्विक सैन्य संतुलन को पूरी तरह से बदलने वाले एक बड़े घटनाक्रम में चीन ने एक अत्यंत आधुनिक और घातक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (Hypersonic Glide Vehicle) विकसित किया है। यह नया हथियार हवा में हजारों मील की दूरी से दुश्मन के विमानों पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागने में पूरी तरह से सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक के आने के बाद युद्ध क्षेत्र से बहुत पीछे सुरक्षित समझे जाने वाले विमान भी अब चीन के निशाने पर सीधे आ गए हैं।

By Sushil Sah 
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बीजिंग। वैश्विक सैन्य संतुलन को पूरी तरह से बदलने वाले एक बड़े घटनाक्रम में चीन ने एक अत्यंत आधुनिक और घातक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (Hypersonic Glide Vehicle) विकसित किया है। यह नया हथियार हवा में हजारों मील की दूरी से दुश्मन के विमानों पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागने में पूरी तरह से सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक के आने के बाद युद्ध क्षेत्र से बहुत पीछे सुरक्षित समझे जाने वाले विमान भी अब चीन के निशाने पर सीधे आ गए हैं।

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युद्ध रणनीति बदलने वाला ‘सुपर वेपन’

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का यह हथियार पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों से बिल्कुल अलग है। यह पहली बार है जब किसी देश ने हाइपरसोनिक गति यानी आवाज से पांच गुना तेज उड़ने वाले व्हीकल में हवा से हवा में मार करने वाली प्रणाली को सफलतापूर्वक जोड़ा है।

मुख्य विशेषताएं और मारक क्षमता

चीन की DF-17 मिसाइल से लॉन्च होने वाला यह HGV 2,414 किलोमीटर यानी 1,500 मील तक मार कर सकता है। वहीं, DF-27 मिसाइल के साथ इसकी रेंज 5,000 मील तक पहुंच जाती है, जिससे हवाई और गुआम जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी इसके दायरे में आ जाते हैं। यह व्हीकल न सिर्फ मैक 5+ (Mach 5+) की रफ्तार से चलता है, बल्कि हवा में अपनी दिशा बदलने में भी सक्षम है। इस कारण दुनिया का कोई भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक नहीं कर सकता। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध में पीछे छिपे कमांड विमान (AWACS) और हवाई ईंधन टैंकरों को नष्ट करना है, जो किसी भी वायुसेना की नीव होते हैं।

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भारत और अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती

आपको बता दें कि इस तकनीक ने विश्व भर के रक्षा खेमे में खलबली मचा दी है। क्योंकि वर्तमान में अमेरिका या किसी भी पश्चिमी देश के पास हाइपरसोनिक व्हीकल से हवा से हवा में मिसाइल दागने की ऐसी नई तकनीक मौजूद नहीं है। चीन के पास पहले से ही 3,150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार है, जिसे वह लगातार अपग्रेड कर रहा है। वहीं रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह तकनीक भारत और अमेरिका दोनों के लिए एक गंभीर रणनीतिक चुनौती है। इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना भी अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों, जैसे AIM-174B और AIM-424 Malice के परीक्षणों में काफी तीव्रता ला रही है।

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