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20 लाख बैंक बैलेंस और 2 लाख रुपये पार्टी फंड देने वाले को कांग्रेस देगी टिकट, यूपी विधानसभा चुनाव रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Elections 2027) की तैयारी के बीच कांग्रेस ने टिकट वितरण को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने के संकेत दिए हैं। इस बार पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की तैयारी में है जो जनाधार के साथ चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन भी रखते हों।

By santosh singh 
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लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Elections 2027) की तैयारी के बीच कांग्रेस ने टिकट वितरण को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने के संकेत दिए हैं। इस बार पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की तैयारी में है जो जनाधार के साथ चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन भी रखते हों। रिपोर्ट के मुताबिक टिकट के दावेदारों से बैंक खाते में करीब 20 लाख रुपये की उपलब्धता का प्रमाण मांगा जा सकता है। करीब 2 लाख रुपये पार्टी फंड में योगदान देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

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कांग्रेस की नई रणनीति के पीछे 2022 विधानसभा चुनाव का अनुभव अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उस चुनाव में कांग्रेस ने कई प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए 70 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी थी। पार्टी के भीतर बाद में यह शिकायत सामने आई कि कुछ उम्मीदवारों ने चुनाव के लिए मिली रकम का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया और पैसा बचा लिया। 2022 में कांग्रेस ने यूपी की 399 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल दो सीटों पर जीत मिली। अब पार्टी पिछली व्यवस्था से सबक लेते हुए उम्मीदवारों की चुनावी क्षमता और संसाधनों पर ज्यादा जोर देने की तैयारी में है।

प्रत्याशियों को नहीं मिलेगा बड़ा चुनावी फंड

कांग्रेस इस बार प्रत्याशियों को पिछली तरह बड़ी रकम देकर चुनाव लड़ाने के बजाय प्रचार सामग्री और संगठनात्मक सहयोग देने की योजना बना रही है। यानी पार्टी ऐसे दावेदारों को मैदान में उतारना चाहती है जो अपने स्तर पर भी चुनावी खर्च संभालने में सक्षम हों। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में टिकट के दावेदार को अपने बैंक खाते में करीब 20 लाख रुपये का बैलेंस दिखाना पड़ सकता है। इसके साथ करीब 2 लाख रुपये पार्टी फंड में देने की बात सामने आई है। हालांकि यह अंतिम और औपचारिक नियम है, ऐसा कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।

सिर्फ पैसा नहीं, जिताऊ क्षमता भी जरूरी

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कांग्रेस की रणनीति का मतलब केवल आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों को टिकट देना नहीं है। पार्टी ऐसे चेहरों को प्राथमिकता देना चाहती है जिनकी क्षेत्र में पकड़, जनसंपर्क, राजनीतिक सक्रियता और जीतने की वास्तविक संभावना हो। मजबूत जनाधार वाले लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों के लिए अपवाद की गुंजाइश भी रखी जा सकती है। कांग्रेस के संभावित टिकट फॉर्मूले में पैसा जनाधार जिताऊ क्षमता तीनों को महत्व दिए जाने के संकेत हैं।

सीट बंटवारे के बीच उम्मीदवारों की तलाश

2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर खींचतान भी जारी है। कांग्रेस यूपी में ज्यादा सीटों की मांग कर रही है और पार्टी के भीतर मजबूत उम्मीदवारों की तलाश उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व गठबंधन में बड़ी हिस्सेदारी के लिए दबाव बना रहा है। हालिया रिपोर्टों में कांग्रेस के यूपी संगठन की ओर से टिकट वितरण में जमीनी क्षमता और संभावित जीत को महत्व देने की बात भी सामने आई है।

टिकट की दौड़ में बदलेगा समीकरण

अगर यह प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो  विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस के टिकट की दौड़ का समीकरण बदल सकता है। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ ऐसे दावेदारों को भी महत्व मिल सकता है, जो अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने के साथ चुनावी संसाधन जुटाने में सक्षम हों।फिलहाल 20 लाख रुपये के बैंक बैलेंस और 2 लाख रुपये के पार्टी फंड योगदान वाली व्यवस्था रिपोर्टों में प्रस्तावित रणनीति के तौर पर सामने आई है।

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