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बंगाल ने लिखी महिला आरक्षण बिल गिराने की स्क्रिप्ट? अखिलेश ने ममता तो राहुल ने अभिषेक को लगाया फोन

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाया, क्योंकि बिल को पास करने के लिए जो दो तिहाई बहुमत चाहिए था, वह नहीं मिल पाया। राजनीतिक गलियारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बिल के पास ना होने का मुख्य कारण टीएमसी यानी कि तृणमूल कांग्रेस रही है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाया, क्योंकि बिल को पास करने के लिए जो दो तिहाई बहुमत चाहिए था, वह नहीं मिल पाया। राजनीतिक गलियारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बिल के पास ना होने का मुख्य कारण टीएमसी यानी कि तृणमूल कांग्रेस रही है।

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क्योंकि लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही स्थगित हुई और सभी पक्ष-विपक्ष के नेता बाहर आए। वैसे ही कई बड़े नेताओं ने टीएमसी के नेताओं को फोन कर धन्यवाद दिया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को फोन कर थैंक्यू बोला। राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को चुनाव के बावजूद 20 प्लस सांसदों को भेजने के लिए धन्यवाद दिया। इस दौरान अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी को कहा कि देश में लहर बीजेपी के खिलाफ बन रही है।

अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को किया फोन

वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को फोन किया। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बेहतर फ्लोर कोऑर्डिनेशन के लिए डेरेक ओ ब्रायन को फोन कर धन्यवाद दिया। महिला आरक्षण बिल पर सरकार को हराने के लिए टीएमसी नेताओं को अलग-अलग नेताओं ने धन्यवाद दिया।

अमित शाह ने ट्वीट कर विपक्ष पर साधा निशाना

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, कि आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है। अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है। उनकी यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के. मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहाँ नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी. विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।

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