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नवरात्र में हर दिन बिहार के इस मंदिर में नवरात्र पर होती है अनोखी बलि, बकरे का नहीं बहाया जाता खून

देशभर के देवी मंदिरों में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसी बीच अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए बिहार के कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर काफी चर्चा में रहता है। यहां पर बकरे की बलि देने की परंपरा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस दौरान बकरे का वध नहीं किया जाता और खून भी नहीं बहता।

By Sushil Sah 
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कैमूर। देशभर के देवी मंदिरों में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसी बीच अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए बिहार के कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर काफी चर्चा में रहता है। यहां पर बकरे की बलि देने की परंपरा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस दौरान बकरे का वध नहीं किया जाता और खून भी नहीं बहता।

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क्या है बलि की अनोखी परंपरा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां वैसे श्रद्धालु मां मुंडेश्वरी के दरबार में बकरा लेकर पहुंचते हैं, जिनकी मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान पुजारी बकरे पर चावल के अक्षत और फूल चढ़ाते हैं। इस धार्मिक प्रक्रिया में बकरा कुछ समय के लिए बेसुध हो जाता है। फिर बाद में दोबारा अक्षत और फूल चढ़ाने पर वह बकरा उठ जाता है जिसे श्रद्धालु देवी की स्वीकृति मानते हैं। इसके बाद बकरे को वापस श्रद्धालुओं को सौंप दिया जाता है।

कहां स्थित है मंदिर?

आपको बता दें कि मां मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड में पवरा पहाड़ी पर स्थित है। यह अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक मान्यताओं के लिए बहुत प्रसिद्ध है। साथ ही बिहार सरकार के जिला प्रशासन की वेबसाइट भी यहां बकरे की ऐसी बलि की परंपरा का उल्लेख करती है, जिसमें पशु का वध नहीं किया जाता।

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दशहरा में नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह अनोखी परंपरा देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। बता दें कि इस परंपरा को रक्तविहीन या अहिंसक बलि कहा जाता है।

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