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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन का 101 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन, 2006 से 2011 तक थे सीएम

देश में शोक की लहर दौर गई है। 101 साल की उम्र में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता अच्युतानंदन (Former Kerala Chief Minister Achuthanandan) का निधन हो गया है। सोमवार दोपहर 3.20 बजे एसयूटी अस्पताल में अंतिम सांस ली। सोमवार सुबह उन्हे दिल का दौरा पड़ा था।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। देश में शोक की लहर दौर गई है। 101 साल की उम्र में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता अच्युतानंदन (Former Kerala Chief Minister Achuthanandan) का निधन हो गया है। सोमवार दोपहर 3.20 बजे एसयूटी अस्पताल में अंतिम सांस ली। सोमवार सुबह उन्हे दिल का दौरा पड़ा था। जिसके बाद उन्से सांस लेने में दिक्कत हुई। आनन-फानन में उन्हे एसयूटी अस्पताल ले जाएगा। जहां डाक्टरों ने आईसीयू में रखा था और थोड़ी देर बाद उनकी मृत्यु हो गई।

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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता अच्युतानंदन का 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया। यह जानकारी सीपीआई (एम) ने दी है। माकपा के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन (Former Chief Minister Achuthanandan) लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। 101 वर्षीय अच्युतानंदन को 23 जून को भी घर पर दिल का दौरा आया था। जनवरी 2021 में प्रशासनिक सुधार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद से वे तिरुवनंतपुरम में अपने बेटे या बेटी के घर पर रह रहे थे। सोमवार को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Chief Minister Pinarayi Vijayan) और माकपा नेता उनसे मिलने अस्पताल गए थे। मुख्यमंत्री के अलावा, वित्त मंत्री केएन बालगोपाल (Finance Minister KN Balagopal) और राज्य सचिव समेत पार्टी के कई नेता सोमवार दोपहर अच्युतानंदन से मिलने अस्पताल गए थे।

कौन थे वीएस अच्युतानंदन?

अच्युतानंदन केरल की राजनीति में एक कद्दावर हस्ती थे। अच्युतानंदन सात बार विधायक रहे और अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने 10 चुनाव लड़े। इन दस चुनावों में से उन्हें केवल तीन में हार का सामना करना पड़ा और सात बार उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की थी। वी.एस. अच्युतानंदन 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे। सामाजिक न्याय और मज़दूरों के अधिकारों के लिए आजीवन अभियान चलाने वाले अच्युतानंदन उस समूह के अंतिम जीवित सदस्यों में से एक थे जिसने 1964 में अविभाजित कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की स्थापना की थी।

रिपोर्ट: सतीश सिंह

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