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Gen-Z का अनोखा बिजनेस मॉडल : शादी में रिश्तेदारों की जगह विदेशी मेहमान, प्रति व्यक्ति 25,000 रुपये की कमाई

भारतीय शादियां अपनी भव्यता, स्वादिष्ट पकवानों, ढोल-नगाड़ों और लंबे समय तक चलने वाले रस्म-रिवाजों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं, लेकिन आज की GenZ पीढ़ी (युवा वर्ग) परंपराओं को निभाने के साथ-साथ इसमें से कमाई का जरिया भी निकाल रही है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों एक अनोखा बिजनेस मॉडल तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। भारतीय शादियां अपनी भव्यता, स्वादिष्ट पकवानों, ढोल-नगाड़ों और लंबे समय तक चलने वाले रस्म-रिवाजों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं, लेकिन आज की GenZ पीढ़ी (युवा वर्ग) परंपराओं को निभाने के साथ-साथ इसमें से कमाई का जरिया भी निकाल रही है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों एक अनोखा बिजनेस मॉडल तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस ट्रेंड के तहत युवा अपनी शादियों में दूर-दराज के तने-ताने मारने वाले रिश्तेदारों को बुलाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों (Foreign Tourists) को आमंत्रित कर रहे हैं और उनसे इसके बदले मोटी रकम वसूल रहे हैं।

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इसे ‘वेडिंग टूरिज्म’ (Wedding Tourism) नाम दिया जा रहा है। रिपोर्टों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, भारत यात्रा पर आने वाले विदेशी पर्यटकों को भारतीय शादी के जश्न का असली अनुभव लेने के लिए टिकट बेचे जा रहे हैं। एक पर्यटक से एक या दो दिन के इवेंट में शामिल होने के लिए लगभग 12,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये ($150 से $300) तक चार्ज किया जा रहा है।

कैसे काम करता है यह बिजनेस?

प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन : विवाह करने वाले जोड़े ऐसे स्टार्टअप्स और वेबसाइट्स पर अपनी शादी की तारीख, जगह और रस्मों का विवरण दर्ज करते हैं।

टिकट की बिक्री: भारत आने वाले विदेशी टूरिस्ट इन वेबसाइट्स के जरिए शादी में शामिल होने के लिए एंट्री पास या टिकट खरीदते हैं।

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विदेशी मेहमानों को भारतीय पारंपरिक कपड़े पहनने (जैसे लहंगा या कुर्ता-पायजामा) और रीति-रिवाजों का सम्मान करने की सलाह दी जाती है।

दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा

GenZ का यह दिमाग वाकई तारीफ के काबिल माना जा रहा है। जहां एक तरफ भारतीय शादियों का भारी-भरकम खर्च थोड़ा कम हो जाता है, वहीं दूसरी तरफ दूल्हा-दुल्हन को ऐसे बिन-बुलाए ताने देने वाले रिश्तेदारों से मुक्ति मिल जाती है जो अक्सर व्यवस्थाओं में कमियां निकालते हैं। टिकट बिक्री से मिलने वाले पैसों का एक बड़ा हिस्सा सीधे दूल्हा-दुल्हन को मिलता है, जिससे वे अपने कैटरिंग या डेकोरेशन का खर्च निकाल लेते हैं।

दूसरी ओर, विदेशियों के लिए यह एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव बन जाता है। वे बारात में नाचने, पारंपरिक भोजन का स्वाद चखने, मेहंदी लगवाने और भारतीय संस्कृति को करीब से देखने का लुत्फ उठाते हैं।

इंटरनेट पर लोग इस बिजनेस आइडिया की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे “कमाई के साथ-साथ मस्ती” का बेहतरीन जरिया बता रहे हैं। भारतीय शादियों का यह नया अवतार वाकई आधुनिक सोच और बिजनेस माइंडसेट का अनोखा मेल है।

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रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा

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