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चुनावी हार की बौखलाहट में ये अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का कर रहे षड्यंत्र…PM मोदी पर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर​ लिखा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचन आयोग को बिहार की समस्त मतदाता सूची को निरस्त कर केवल 25 दिन में 1987 से पूर्व के कागजी सबूतों के साथ नई मतदाता सूची बनाने का निर्देश दिया है। चुनावी हार की बौखलाहट में ये लोग अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का षड्यंत्र कर रहे हैं।

By शिव मौर्या 
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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है। चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू हो चुका है। निर्वाचन आयोग के इस फैसले के बाद राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दल के नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार और निर्वाचन आयोग पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। अब राजद नेता तेजस्वी यादव का बड़ा बयान आया है। उन्होंने चुनावी हार की बौखलाहट में ये लोग अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का षड्यंत्र कर रहे हैं।

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तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सोशल मीडिया एक्स पर​ लिखा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचन आयोग को बिहार की समस्त मतदाता सूची को निरस्त कर केवल 25 दिन में 1987 से पूर्व के कागजी सबूतों के साथ नई मतदाता सूची बनाने का निर्देश दिया है। चुनावी हार की बौखलाहट में ये लोग अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का षड्यंत्र कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर ये आपका वोट काटेंगे ताकि मतदाता पहचान पत्र ना बन सके। फिर ये आपको राशन, पेंशन, आरक्षण, छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं से वंचित कर देंगे। महागठबंधन के साथियों के साथ कल प्रेस वार्ता में इस विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखी।

वहीं, शुक्रवार को इंडिया गठबंधन के प्रेस कॉफ्रेंस में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी बड़ा हमला बोला था। उन्होंने कहा कि, ऐसे में सवाल उठते हैं कि-आखिर ये अब क्यों किया जा रहा है? इस पूरी प्रक्रिया को, मानसून के दिनों में बिहार के बाढ़-प्रभावित इलाकों में, एक महीने में कैसे पूरा किया जाएगा? लोकसभा चुनाव के वक्त जब इसी वोटर लिस्ट पर वोट पड़े हैं, तो विधानसभा में क्यों नहीं? साफ है, जब भी BJP पर संकट आता है, वो चुनाव आयोग की तरफ भागते हैं। चुनाव आयोग मोदी जी के तीन बंदर हैं। न सच सुनते हैं, न सच देखते हैं, न सच बोलते हैं।

 

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