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उद्योग जगत में स्वैच्छिक एलईआई की बढ़ती स्वीकार्यता

लखनऊ। वैश्विक कारोबारी परिदृश्य में पारदर्शिता अब केवल नियामकीय मजबूरी नहीं रह गई है, बल्कि भरोसे और जिम्मेदार कॉर्पोरेट गवर्नेंस का अहम संकेत बनती जा रही है। इसी कड़ी में लीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर (एलईआई) को स्वेच्छा से अपनाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जिसे उद्योग जगत कॉर्पोरेट नैतिकता के नए मानक के रूप में देख रहा है।

By Abhimanyu 
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लखनऊ। वैश्विक कारोबारी परिदृश्य में पारदर्शिता अब केवल नियामकीय मजबूरी नहीं रह गई है, बल्कि भरोसे और जिम्मेदार कॉर्पोरेट गवर्नेंस का अहम संकेत बनती जा रही है। इसी कड़ी में लीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर (एलईआई) को स्वेच्छा से अपनाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जिसे उद्योग जगत कॉर्पोरेट नैतिकता के नए मानक के रूप में देख रहा है।

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अब तक एलईआई को नियामकीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लिया जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में कई कंपनियां बिना किसी अनिवार्यता के इसे अपनाने लगी हैं। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, यह बदलाव उस सोच को दर्शाता है जिसमें पारदर्शिता को बोझ नहीं, बल्कि रणनीतिक लाभ माना जा रहा है।

जी 20 – एफएसबी पहल से जुड़ी वैश्विक पृष्ठभूमि

एलईआई प्रणाली की नींव 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद जी20 देशों और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (एफएसबी) की सिफारिशों पर रखी गई थी। इसका उद्देश्य सीमा-पार वित्तीय लेन-देन में शामिल कानूनी संस्थाओं और उनके स्वामित्व ढांचे की स्पष्ट और एकरूप पहचान सुनिश्चित करना था। आज एलईआई को वैश्विक वित्तीय पारदर्शिता, प्रणालीगत जोखिम की निगरानी और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने की बुनियादी व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।

स्वेच्छा से एलईआई अपनाने वाली कंपनियों में हुई बढ़ोतरी

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एलईआई इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, जो कि जीएलईआईएफ से मान्यता प्राप्त एलईआई जारीकर्ता और टीएनवी ग्लोबल लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कंपनी के निदेशक प्रज्ञेश कुमार सिंह ने कहा कि हाल के समय में स्वेच्छा से एलईआई के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उनके अनुसार, एलईआई को स्वेच्छा से अपनाना अब अच्छे कॉर्पोरेट गवर्नेंस का स्पष्ट संकेत बन गया है। इससे न केवल नियामकों का भरोसा बढ़ता है, बल्कि निवेशकों, बैंकों और वैश्विक व्यावसायिक भागीदारों के साथ भी विश्वास मजबूत होता है।

कॉर्पोरेट नैतिकता की नई पहचान

एलईआई एक 20 अंकों का वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त अल्फ़ान्यूमेरिक कोड है, जो वित्तीय लेन-देन में शामिल कानूनी संस्थाओं की विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करता है। इसे स्वेच्छा से अपनाने वाली कंपनियां पारदर्शिता, नैतिक आचरण और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। ऐसी कंपनियों को बैंकों के साथ बेहतर कार्य संबंध, तेज़ ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अधिक विश्वसनीयता जैसे लाभ भी मिल रहे हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता दायरा

दुनिया भर में एलईआई पंजीकरण लगातार बढ़ रहे हैं और इसका उपयोग अब केवल विनियमित वित्तीय संस्थानों तक सीमित नहीं है। सीमा-पार व्यापार, डिजिटल वाणिज्य और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी कंपनियां स्वेच्छा से एलईआई अपना रही हैं। ग्लोबल लीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर फ़ाउंडेशन (जीएलईआईएफ) भी लगातार इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि एलईआई प्रणाली बाज़ार पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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स्वैच्छिक अपनाने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियां एलईआई को स्वेच्छा से इसलिए अपना रही हैं, क्योंकि यह बिना मांगे विश्वास पैदा करता है, वैश्विक नीति-दिशा के अनुरूप है, कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को दर्शाता है और भविष्य में बदलते नियामकीय मानकों के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करता है।

ईमानदारी और भरोसे का प्रतीक

जैसे-जैसे वैश्विक वित्तीय प्रणालियां अधिक पारदर्शिता की मांग कर रही हैं, एलईआई को स्वेच्छा से अपनाना नैतिक कॉर्पोरेट संस्कृति की पहचान बनता जा रहा है। जो पहल कभी केवल एक नियामकीय कदम मानी जाती थी, वह आज वैश्विक बाज़ार में ईमानदारी, विश्वसनीयता और जिम्मेदार व्यापार का प्रतीक बन चुकी है।

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