अमेरिका-इज़रायल-ईरान जंग को 25 दिन बीत चुके हैं। जहां एक तरफ युद्ध सीजफायर के लिए कूटनीतिक बातचीत को लेकर हलचल तेज हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने कैस्पियन सागर में पहली बार मिसाइलें दागी है।
Israel fires missiles into Caspian Sea : अमेरिका-इज़रायल-ईरान जंग को 25 दिन बीत चुके हैं। जहां एक तरफ युद्ध सीजफायर के लिए कूटनीतिक बातचीत को लेकर हलचल तेज हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने कैस्पियन सागर में पहली बार मिसाइलें दागी है। इसके साथ ही सैन्य गतिविधियां भी जारी हैं। खबरों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में इजरायल ने पहली बार कैस्पियन सागर में हमला कर रूस और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण हथियार सप्लाई लाइन (Arms Supply Line ) को निशाना बनाया है। हमले में वॉरशिप, नेवल कमांड सेंटर, शिपयार्ड, रिपेयर फैसिलिटीज और दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
यह हमला ईरान के बंदर अंजली बंदरगाह ( Anjali Bandargah ) पर किया गया, जो दोनों देशों के बीच ड्रोन, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की आवाजाही (Movement of military equipment) का प्रमुख रूट था।
कैस्पियन सागर दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्देशीय जल क्षेत्र ( Inland Watersheds ) है और लंबे समय से रूस-ईरान के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर रहा है, जहां अमेरिकी नौसेना (U.S. Navy) की पहुंच नहीं होती। इस हमले से जंग का दायरा और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
बंदर अंजली सिर्फ हथियार सप्लाई का केंद्र नहीं, बल्कि गेहूं और अन्य जरूरी सामान के व्यापार का भी रूट है। हमले से इन व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय फूड सिक्योरिटी (Regional Food Security ) प्रभावित हो सकती है। रूस ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे सिविलियन ट्रेड हब पर हमला बताया है। मॉस्को ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई जंग को और फैला सकती है।
इस बीच दुनिया की नजर रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट ( Sea route Hormuz Strait ) पर टिकी हुई है। कई देशों ने इस रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को तय करने की मांग की है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा भाग इस मांग से होकर गुजरता है। सैन्य तैयारी के साथ कूटनीतिक बातचीत के दौर में आने वाले समय में हालात किस ओर रुख करेंगे यह देखना दिलचस्प होगा।