1. हिन्दी समाचार
  2. तकनीक
  3. कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘इंटरनेट बैन’, टेक कर्फ्यू’ और स्क्रीन टाइम

कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘इंटरनेट बैन’, टेक कर्फ्यू’ और स्क्रीन टाइम

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार (Siddaramaiah Government) बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए ने एक परिवर्तनकारी कदम उठाया है। राज्य ने 'विद्यार्थियों के बीच जिम्मेदार डिजिटल उपयोग नीति' (Draft Policy for Responsible Digital Use) का मसौदा जारी किया है, जिसे 'डिजिटल डिटॉक्स' (Digital detox) योजना भी कहा जा रहा है।

By santosh singh 
Updated Date

बेंगलुरु। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार (Siddaramaiah Government) बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए ने एक परिवर्तनकारी कदम उठाया है। राज्य ने ‘विद्यार्थियों के बीच जिम्मेदार डिजिटल उपयोग नीति’ (Draft Policy for Responsible Digital Use) का मसौदा जारी किया है, जिसे ‘डिजिटल डिटॉक्स’ (Digital detox) योजना भी कहा जा रहा है। आइए बताते हैं नई नीति के मुख्य तथ्य:

पढ़ें :- कर्नाटक विधानसभा में हंगामा: BJP विधायकों ने पूरा वंदे मातरम गाया, दो पैरा के बाद रिकॉर्डिंग रुकी

शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट पर ‘ब्रेक

पॉलिसी के सबसे चर्चित प्रस्ताव के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए शाम 7 बजे के बाद मोबाइल डेटा स्वचालित (Automatic) रूप से बंद करने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को रात में सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बचाना है।

सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध

सरकार ने 16 साल से कम आयु के किशोरों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। उम्र की पुष्टि के लिए ‘आधार-आधारित साइन-अप’ (Aadhaar-enabled verification) अनिवार्य करने की योजना है ताकि बच्चे अपनी उम्र छिपाकर अकाउंट न बना सकें।

पढ़ें :- WhatsApp पर मंगाया टिकट या उसका स्क्रीनशॉट नहीं माना जाएगा वैध और ऐसा करने पर लग सकता है जुर्माना

स्कूलों के लिए सख्त नियम

स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे होमवर्क या सूचनाओं के लिए WhatsApp का उपयोग बंद करें और पारंपरिक डायरी सिस्टम पर लौटें। डिजिटल वेलनेस कमेटी: हर स्कूल में एक विशेष समिति बनाई जाएगी जो छात्रों के डिजिटल व्यवहार की निगरानी करेगी। हर स्कूल में एक विशेष समिति बनाई जाएगी जो छात्रों के डिजिटल व्यवहार की निगरानी करेगी।

टेक कर्फ्यू’ और स्क्रीन टाइम

मनोरंजक स्क्रीन टाइम को दिन में अधिकतम 1 घंटे तक सीमित करने की सिफारिश की गई है। बेडरूम और डाइनिंग टेबल को ‘डिजिटल फ्री जोन’ घोषित करने का सुझाव है ताकि परिवार के साथ समय बिताने को बढ़ावा मिले।

NIMHANS का सहयोग

पढ़ें :- कंटेंट पायरेसी पर एक्शन, तुरंत रोक लगाए टेलीग्राम, 15 दिन में सरकार ने मांगी रिपोर्ट

यह नीति नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS ) के सहयोग से तैयार की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में इंटरनेट की लत लगभग 25 फीसदी तक होने के कारण मानसिक तनाव, अनिद्रा और एकाग्रता की कमी देखी जा रही है।

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में यह अभी एक ‘मसौदा’ है। सरकार ने इस पर जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद इसे अंतिम कानून का रूप दिया जा सकता है।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...