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होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘गोरिल्ला वॉर’ का आगाज़, वैश्विक तेल सप्लाई पर मंडराया खतरा

ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच जारी तनाव अब समुद्र में एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी पारंपरिक नौसेना के बजाय 'नौसैनिक गोरिल्ला युद्ध' की रणनीति अपना ली है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच जारी तनाव अब समुद्र में एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी पारंपरिक नौसेना के बजाय ‘नौसैनिक गोरिल्ला युद्ध’ की रणनीति अपना ली है।

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ईरान की ‘हिट एंड रन’ रणनीति

ताज़ा इंटेलिजेंस रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज की खाड़ी में सैकड़ों की संख्या में ‘फास्ट अटैक क्राफ्ट्स’ तैनात किए हैं। ये छोटी और बेहद तेज़ रफ़्तार वाली नावें आधुनिक मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस हैं। ये नावें बड़े अमेरिकी युद्धपोतों के सामने सीधे आने के बजाय छिपकर हमला करती हैं और तुरंत गायब हो जाती हैं। अमेरिका के भारी-भरकम जहाजों के लिए इन छोटी नावों को ट्रैक करना और निशाना बनाना मुश्किल हो रहा है।

ईरान ने होर्मुज के संकरे रास्तों में हजारों समुद्री माइंस (Naval Mines) बिछा दी हैं। इन माइंस के कारण कमर्शियल तेल टैंकरों का रास्ता पूरी तरह असुरक्षित हो गया है। इसके साथ ही, ‘शहाद’ जैसे आत्मघाती ड्रोंस का झुंड (Swarm) उन जहाजों को निशाना बना रहा है जो अमेरिकी या इज़राइली गठबंधन से जुड़े माने जा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल गुजरता है।

इस गोरिल्ला युद्ध के कारण कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजने बंद कर दिए हैं। बीमा प्रीमियम में उछाल: युद्ध के जोखिम को देखते हुए जहाजों का बीमा (Insurance) इतना महंगा हो गया है कि ढुलाई की लागत 300% तक बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल को पार कर सकती हैं, जिससे भारत सहित कई देशों में महंगाई का संकट पैदा हो गया है। अमेरिकी नौसेना ने अपने पांचवें बेड़े (5th Fleet) को हाई अलर्ट पर रखा है। ब्रिटेन ने भी अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है ताकि ईरानी मिसाइल लॉन्च पैड्स को नष्ट किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का गोरिल्ला युद्ध ‘अदृश्य दुश्मन’ से लड़ने जैसा है, जहाँ भारी हथियारों से लैस सेना भी असहाय महसूस कर रही है।

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भारत पर प्रभाव

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है। यदि यह गोरिल्ला युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और सप्लाई चेन में रुकावट आने की गंभीर संभावना है।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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