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Makar Sankranti 2024 : बाबा महाकाल को पहले तिल का उबटन लगाया, फिर गर्म जल से स्नान के बाद रमाई भस्म, किया अलौकिक श्रृंगार

Makar Sankranti 2024 : मकर संक्रांति पर्व (Makar Sankranti Festival) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर (Jyotirling Mahakal Temple) में सोमवार सुबह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सुबह चार बजे भस्म आरती (Bhasma Aarti) में पुजारी व पुरोहितों द्वारा भगवान महाकाल (Lord Mahakal) को तिल का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया गया।

By संतोष सिंह 
Updated Date

Makar Sankranti 2024 : मकर संक्रांति पर्व (Makar Sankranti Festival) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर (Jyotirling Mahakal Temple) में सोमवार सुबह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सुबह चार बजे भस्म आरती (Bhasma Aarti) में पुजारी व पुरोहितों द्वारा भगवान महाकाल (Lord Mahakal) को तिल का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया गया। फिर नए वस्त्र और सोने चांदी के आभूषण के साथ ही भगवान का मेवे से शृंगार कर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान को तिल्ली के लड्डू और तिल से बने छप्पन पकवानों का भोग लगाकर आरती भी की गई।

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पं. अभिषेक शर्मा (बाला गुरु) ने बताया कि ज्योतिर्लिंग (Jyotirling)  की पूजन परंपरा में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के अवसर पर भगवान महाकाल (Lord Mahakal)  को तिल से स्नान कराने और तिल्ली के पकवानों का भोग लगाने की परंपरा है। इस दिन भगवान को गुड़ और शक्कर से बने तिल्ली के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। ज्योतिर्लिंग (Jyotirling) की जलाधारी में भी तिल्ली अर्पित की जाती है।

निकलेगी सूर्य देव की सवारी

इंदौर के आध्यात्मिक गुरु कृष्णा मिश्रा गुरुजी ने बताया कि आज शनि नवग्रह मंदिर त्रिवेणी (उज्जैन) में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सूर्य देव (Sun God) की सवारी निकाली जाएगी। सवारी का संदेश पिता पुत्र के रिश्तों में मिठास बनाए रखने का होगा। ज्योतिषी में सूर्य देव (Sun God), शनि देव पिता पुत्र होते हुए भी पारस्परिक शत्रु हैं। पर फिर भी एक दूसरे के घर आना जाना बंद नहीं करते। यही संदेश इस यात्रा के माध्यम से दिया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि आज शनि त्रिवेणी मंदिर (Triveni Temple) के सूर्य देव (Sun God) के गर्भगृह से मंदिर से 101 बटुक ब्राह्मण राम धुन पर सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) के बाद पालकी में सवार सूर्य ग्रह की सवारी रामधुन ताशे, ढोल, फूलों की तोप त्रिवेणी नदी (Triveni River) तक ले जाकर निकालेंगे।

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