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परिवहन आयुक्त किंजल सिंह के तबादले से प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज, आशुतोष निरंजन को सौंपी गई जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में देर रात आईएएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों के इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा परिवहन आयुक्त रहीं किंजल सिंह को लेकर हो रही है।

By santosh singh 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में देर रात आईएएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों के इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा परिवहन आयुक्त रहीं किंजल सिंह को लेकर हो रही है।

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महज 7 महीने के कार्यकाल के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया गया, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनकी जगह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

यह बदलाव महज एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे कई स्तरों पर कारणों की चर्चा तेज हो गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक किंजल सिंह को हटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण विभागीय तालमेल का अभाव बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय में लगातार दिक्कतें सामने आईं।परिवहन मंत्री के साथ तालमेल मजबूत नहीं बन पाया।कई अहम फैसलों में मतभेद की स्थिति बनी रही।इन सभी कारणों ने मिलकर उनकी स्थिति को कमजोर किया, जिसका नतीजा उनके तबादले के रूप में सामने आया। इस पूरे घटनाक्रम को आगामी तबादला नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।सूत्रों की मानें तो सरकार नहीं चाहती थी कि नई नीति लागू होने से पहले किसी तरह का विवाद खड़ा हो।

चर्चाओं के मुताबिक यदि किंजल सिंह पद पर बनी रहतीं, तो तबादलों को लेकर तनाव बढ़ सकता था। विभागीय मंत्री और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती थी। सरकार ने समय रहते बदलाव कर संभावित विवाद को टाल दिया।हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यही चर्चा सबसे ज्यादा है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे आशुतोष निरंजन को इस अहम पद पर बैठाना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।यह तबादला संकेत देती है कि सरकार विभाग में बेहतर समन्वय चाहती है। तबादला नीति को सख्ती से लागू करने की तैयारी है,प्रशासनिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है।यह तबादला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि कार्यकाल बेहद छोटा (सिर्फ 7 महीने) रहा। निर्णय की टाइमिंग (तबादला नीति से पहले) अहम है। किंजल सिंह का तबादला उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जब नई तबादला नीति लागू होगी, तब इस फैसले के दूरगामी प्रभाव साफ नजर आ सकते हैं।फिलहाल, यह मामला प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।

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