चंद्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का करक माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि माघ पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के दर्शन का विशेष महत्व है।
Magh Purnima 2026 : चंद्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का करक माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि माघ पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के दर्शन का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त और पूर्ण रूप में होता है, जो पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा और शीतलता बरसाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अमृत वर्षा होती है, जिससे नदियाँ और सरोवर अमृत तुल्य हो जाते हैं। इस दिन पवित्र स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और चंद्र देव को अर्घ्य देने से सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने का विधान है। माघी पूर्णिमा पर विष्णुजी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
माघ पूर्णिमा कब है?
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी, रविवार को सुबह 5 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 1 फरवरी को मध्य रात्रि के पश्चात 3 बजकर 39 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि पर पड़ने पर पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। ऐसे में 1 फरवरी के दिन ही माघ पूर्णिमा का व्रत और स्नान दान किया जाएगा।
दांपत्य जीवन में सुख
वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने के लिए दंपत्ति को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना विशेष फलदायी बताया गया है।
समसप्तक राजयोग
इस दिन सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने की स्थिति में होते हैं, जिसे समसप्तक राजयोग माना जाता है। यह योग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
जो लोग ग्रह दोष या गृह शांति चाहते हैं, वे माघ पूर्णिमा के दिन संबंधित ग्रहों के अनुसार दान करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, संतान सुख की कामना रखने वाले दंपती इस दिन विशेष दान, हवन और मंत्र जप कर लाभ पा सकते हैं।