जब ,जब 'ब्रह्मांड' में असुरों का प्रभाव बढ़ा तब ,तब भगवान श्रीनारायण ने विभिन्न रूपों में अवतार लेकर देवताओं की रक्षा की। जहां भगवान विष्णु ने सभी अवतार पुरूष के रूप में लिए वहीं भगवान विष्णु एकमात्र स्त्री अवतार 'मोहिनी' रूप हुआ। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
Mohini Ekadashi 2026 : जब ,जब ‘ब्रह्मांड’ में असुरों का प्रभाव बढ़ा तब, तब भगवान श्रीनारायण ने विभिन्न रूपों में अवतार लेकर देवताओं की रक्षा की। जहां भगवान विष्णु ने सभी अवतार पुरूष के रूप में लिए वहीं भगवान विष्णु एकमात्र स्त्री अवतार ‘मोहिनी’ रूप हुआ।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान असुरों से अमृत की रक्षा करने और देवताओं को अमृत पिलाने के लिए धारण किया था। यह अवतार विष्णु जी के परम मोहक और स्त्री शक्ति का प्रतीक है, जिसने देवताओं के प्राण बचाए।
मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए इसी दिन भगवान विष्णु ने ‘मोहिनी’ रूप धारण किया था। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और विधि-पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेंगे:
मोहिनी एकादशी तिथि: 27 अप्रैल 2026, सोमवार
एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026 को शाम 06:06 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026 को शाम 06:15 बजे तक
पारण (व्रत तोड़ने का समय): 28 अप्रैल 2026 को सुबह 05:43 से 08:21 के बीच
मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें और अंत में आरती करें।