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मुरली मनोहर जोशी ने कहा- ‘विश्वगुरु’ शब्द हमें नहीं बोलना चाहिए, हम आज कल विश्वगुरु नहीं हैं…’

Murli Manohar Joshi's Remarks on 'Vishwaguru' : भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि हम पहले विश्वगुरु थे, लेकिन अब हम विश्वगुरु नहीं हैं। इसलिए हमें ये शब्द नहीं बोलना चाहिए। उनका यह बयान संस्कृत भारती के कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर सामने आया है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है; एक दिन क्वांटम कंप्यूटिंग में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होगी।

By Abhimanyu 
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Murli Manohar Joshi’s Remarks on ‘Vishwaguru’ : भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि हम पहले विश्वगुरु थे, लेकिन अब हम विश्वगुरु नहीं हैं। इसलिए हमें ये शब्द नहीं बोलना चाहिए। उनका यह बयान संस्कृत भारती के कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर सामने आया है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है; एक दिन क्वांटम कंप्यूटिंग में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होगी।

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दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी से पूछा गया था कि देश विश्वगरु है, एआई को लेकर भी बड़ा हब बन चुका है तो भाषा को लेकर क्या भूमिका है और भारत आज एक ‘विश्वगुरु’ है। इस पर जोशी ने कहा कि मेरा मानना है कि ‘विश्व गुरु’ शब्द हमें नहीं बोलना चाहिए। हम विश्व गुरु नहीं हैं।’ उन्होंने कहा, ‘विश्व गुरु’ हम कभी थे… ‘विश्व गुरु’ होना चाहिए। मगर आज हम विश्व गुरु हैं ऐसा नहीं है। लेकिन संस्कृत उस दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी NASA के लोग बार-बार कहते हैं कि संस्कृत संप्रेषण की सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।”

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पूर्व मंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा, “मैं यह समझता हूं कि भारत की अभूतपूर्व देन होगी अगर हम संस्कृत को विश्व संप्रेषण की भाषा जल्द से जल्दी बनाया जाए, क्योंकि इसी भाषा में वो शक्ति है जो बहुत बड़े ज्ञान के समुंद्र को एक सीपी में बंद कर सकती है।” फिलहाल, मुरली मनोहर जोशी के ‘विश्वगुरु’ पर बयान सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि भाजपा के नेता अक्सर विश्वगुरु होने की बात कहते हैं।

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