बैरिया की सीट पर 2022 में भाजपा छिनी सीट को वापस पाने की कोशिश करेगी, तो सपा के सामने अपनी जीत बचाने की चुनौती है। दोनों दलों में दावेदारों की बढ़ती संख्या के बीच अब नजर इस बात पर है कि पार्टी आलाकमान किस चेहरे पर भरोसा जताता है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी धीरे-धीरे तेज हो रही है। बलिया की बैरिया विधानसभा सीट भी उन सीटों में शामिल है, जहां चुनाव से पहले ही टिकट को लेकर हलचल बढ़ गई है। इस सीट पर भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों खेमों में कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
बैरिया की मौजूदा तस्वीर समझने के लिए 2022 के चुनाव को देखना जरूरी है। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के जय प्रकाश अंचल ने जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2017 में भाजपा के सुरेंद्र नाथ सिंह यहां से विधायक चुने गए थे। 2022 में भाजपा ने सुरेंद्र नाथ सिंह का टिकट काटकर पूर्व मंत्री और बलिया सदर से विधायक रहे आनंद स्वरूप शुक्ला को मैदान में उतारा था। टिकट कटने के बाद सुरेंद्र नाथ सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। माना गया कि इस वजह से भाजपा के वोटों का समीकरण प्रभावित हुआ और इसका फायदा सपा उम्मीदवार जय प्रकाश अंचल को मिला।

अब 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा और सपा किस चेहरे पर भरोसा जताती हैं। स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के कई नेता टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं और चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के सामने कई मजबूत दावेदार हैं ऐसे में उम्मीदवार का चयन पार्टी के लिए अहम फैसला होगा। वहीं सपा के सामने भी टिकट को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। हालांकि मौजूदा विधायक जय प्रकाश अंचल की स्थिति को लेकर स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण में अलग-अलग राय सामने आ रही है।
बैरिया सीट के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए 2027 में भी मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा के सामने 2022 में गंवाई सीट वापस हासिल करने की चुनौती होगी, जबकि सपा अपनी मौजूदा पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी।
फिलहाल टिकट को लेकर तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन दावेदारों की बढ़ती संख्या ने बैरिया को यूपी चुनाव की उन सीटों में शामिल कर दिया है, जिस पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।