पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Pakistan's Defense Minister Khawaja Asif) ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश की पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान (Pakistan) के बच्चों को 'गलत इतिहास' पढ़ाया जा रहा है। इसकी वजह से देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Pakistan’s Defense Minister Khawaja Asif) ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश की पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान (Pakistan) के बच्चों को ‘गलत इतिहास’ पढ़ाया जा रहा है। इसकी वजह से देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने कहा कि हम पाकिस्तानी मुसलमान (Pakistani Muslims) अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं। पाकिस्तान (Pakistan) के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे।
उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए। ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान (Pakistan)में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया। उन्होंने कहा कि हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे। उन्होंने आगे कहा, कि मेरे पूर्वज हिंदू थे (My Ancestors Were Hindus)। क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी (Pakistani) हो जाता हूं? आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान (Pakistan) में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की।
अमेरिका की लड़ाइयों में पाक को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया
ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान (Pakistan) को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे। आज पाकिस्तान (Pakistan) में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya) और अशोक कौन थे? ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी।
पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था कि मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा।
पाकिस्तान (Pakistan) ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट (Pakistani Passport) पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है। आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम (US Republican Senator Lindsey Graham) ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान (Pakistan) की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता “समस्याओं से भरी” हो सकती है।