सनातन परंपराओं में शुभ और अशुभ कार्यों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यदि किसी काम को शुभ घड़ी या फिर कहें शुभ समय में शुरू किया जाए तो उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
Panchak 2026 : सनातन परंपराओं में शुभ और अशुभ कार्यों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यदि किसी काम को शुभ घड़ी या फिर कहें शुभ समय में शुरू किया जाए तो उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग के अनुसार, दिन, समय और मुहूर्त देखने की मान्यता रही है।
ज्योतिष में जिस पंचक को भी कुछ ऐसा ही अशुभ समय माना गया है, उसकी आज 16 मार्च 2026 को शुरुआत होने जा रही है। पांच दिनों तक लगने वाले इस पंचक का क्या महत्व है? यह कब खत्म होगा।
आज 16 मार्च 2026, सोमवार की शाम को 06:14 बजे प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026, शनिवार को पूर्वाह्न 02:27 बजे समाप्त होगा।
क्यों लगता है पंचक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में अंतिम पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) में होता है, तब लगभग ५ दिनों की अवधि के लिए पंचक लगता है। इसे अशुभ माना जाता है, जिसमें दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना, और लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करने जैसे कार्य वर्जित होते हैं।
मान्यता के अनुसार पंचक के दौरान भगवान शिव और उनके रुद्रावतार माने जाने वाले हनुमान जी की साधना-आराधना अशुभ फलों से बचाने वाली है। ऐसे में व्यक्ति को इन पांच दिनों में इन दोनों देवताओं की पूजा और इनके मंत्रों का जाप अधिक से अधिक करनी चाहिए।
दान
जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या तिल आदि का दान करना चाहिए।