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Panchmukhi Hanuman Avatar : पंचमुखी हनुमान अवतार और निकुंभला देवी का रहस्य,जानें त्रेता युग का सच

ज्येष्ठ माह को हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। युगों युगों से इस माह में हनुमान की सेवा पूजा का विधान है। इस माह पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। हनुमान जी के कई रूप हैं। एक बार हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान के रूप में अवतार लिया। यह कथा इस प्रकार है।रामायण युद्ध के दौरान रावण ने अपने भाई और पाताल लोक के राजा अहिरावण को सहायता के लिए बुलाया।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Panchmukhi Hanuman Avatar : ज्येष्ठ माह को हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। युगों युगों से इस माह में हनुमान की सेवा पूजा का विधान है। इस माह पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। हनुमान जी के कई रूप हैं। एक बार हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान के रूप में अवतार लिया। यह कथा इस प्रकार है। रामायण युद्ध के दौरान रावण ने अपने भाई और पाताल लोक के राजा अहिरावण को सहायता के लिए बुलाया। अहिरावण अपनी मायावी शक्तियों में निपुण था। विभीषण की चेतावनियों के बाद भी, अहिरावण विभीषण का रूप धरकर रात के समय राम-लक्ष्मण के शिविर में घुस गया और सोते हुए दोनों भाइयों का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया। वह वहां अपनी आराध्य देवी महामाया (निकुंभला) के सामने उनकी बलि देना चाहता था।

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पांचों दीपक बुझाकर अहिरावण का वध किया
पंचमुखी हनुमान अवतार की कथाअहिरावण ने राम-लक्ष्मण को बंधक बनाकर पाताल लोक में छुपा दिया था。उसने अपनी गुफा में पांच दिशाओं में पांच दीपक जला रखे थे, जिन्हें एक साथ बुझाने पर ही उसका वध संभव था। तब हनुमान जी ने पंचमुखी रूप (वानर, गरुड़, वराह, नृसिंह और हयग्रीव) धारण किया और एक साथ पांचों दीपक बुझाकर अहिरावण का वध किया।

प्रभु राम और लक्ष्मण को बंधन से मुक्त कराया
पंचमुखी रूप धारण करना: इस कठिन कार्य को पूरा करने के लिए हनुमान जी ने विराट पंचमुखी स्वरूप धारण किया। उनके पांच मुख पांच अलग-अलग दिशाओं में प्रकट हुए। उन्होंने एक ही समय में फूंक मारकर उन पांचों दीपकों को बुझा दिया। दीपकों के बुझते ही अहिरावण की शक्तियां समाप्त हो गईं और हनुमान जी ने उसका वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रभु राम और लक्ष्मण को बंधन से मुक्त कराया।

तांत्रिक शक्तियों को निष्प्रभावी कर दिया
पंचमुखी नरसिंह और उग्र रूपों के माध्यम से इन राक्षसी तांत्रिक शक्तियों के प्रभाव को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया था। यह प्रसंग दर्शाता है कि कितनी भी बड़ी आसुरी या तांत्रिक शक्ति क्यों न हो, धर्म और भक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ता है।

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