1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. डॉ. आरएमएलआईएमएस के निदेशक प्रो. सीएम सिंह बने एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष

डॉ. आरएमएलआईएमएस के निदेशक प्रो. सीएम सिंह बने एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के निदेशक, प्रो. सीएम सिंह को एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का अध्यक्ष चुना गया । यह निर्णय 3 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित ईएफआई गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लिया गया। प्रो. सीएम सिंह  की यह उपलब्धि डॉ. आरएमएलआईएमएस सहित पूरे प्रदेश के चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के निदेशक, प्रो. सीएम सिंह को एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का अध्यक्ष चुना गया । यह निर्णय 3 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित ईएफआई गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लिया गया। प्रो. सीएम सिंह  की यह उपलब्धि डॉ. आरएमएलआईएमएस सहित पूरे प्रदेश के चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। जनस्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया है।

पढ़ें :- Video-असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी और योगी पर कसा तंज, बोले-' आपसे किसने कहा था देश और यूपी कुंवारे के हवाले कर दो, लोग तो कुंवारों को कमरा भी नहीं देते...

एपिडेमियोलॉजी फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न बीमारियों के फैलाव, उनके जोखिम कारकों और प्रभावित आबादी का वैज्ञानिक अध्ययन कर ऐसी रणनीतियां विकसित करना है, जिनसे बीमारियों की समय रहते रोकथाम की जा सके।

प्रो. सीएम सिंह के नेतृत्व में ईएफआई द्वारा महामारी-संबंधी सर्वेक्षण, जनसंख्या-आधारित शोध और बीमारी की निगरानी को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इन अध्ययनों से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र में कौन-सी बीमारियां बढ़ रही हैं, उनके प्रमुख कारण क्या हैं तथा वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं और वास्तविक जनस्वास्थ्य आवश्यकताओं के बीच कहां अंतराल मौजूद हैं।

विशेष रूप से मौलिक और प्राथमिक रोकथाम पर जोर रहेगा। प्राथमिक रोकथाम का उद्देश्य मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग जैसे जोखिम कारकों को विकसित होने से पहले ही रोकना है, जबकि प्राथमिक रोकथाम में जोखिम वाले व्यक्तियों की समय रहते पहचान कर बीमारी होने से बचाने का प्रयास किया जाता है।

समुदाय, विद्यालयों, कार्यस्थलों तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किए जाने वाले महामारी-संबंधी सर्वेक्षण से खान-पान, शारीरिक गतिविधि, मोटापा, तंबाकू सेवन, तनाव, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सबूत-आधारित स्वास्थ्य नीतियां और बीमारी से बचाव वाले स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने में सहायता मिलेगी।

पढ़ें :- आकाश आनन्द को मायावती ने फिर बनाया राष्ट्रीय संयोजक, साथ ही उनके राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना

ईएफआई के माध्यम से युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को महामारी विज्ञान, अनुसंधान पद्धति, जैव-सांख्यिकी और जन-स्वास्थ्य अनुसंधान में प्रशिक्षण देने तथा विभिन्न संस्थानों के बीच बहु-केंद्रित शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. आरएमएलआईएमएस परिवार ने प्रो. सीएम सिंह  को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि उनके नेतृत्व में ईएफआई “इलाज के साथ-साथ बीमारी होने से पहले उसकी रोकथाम” की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और देश में सबूत-आधारित जन स्वास्थ्य को और मजबूत करेगा।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...