महाराष्ट्र के पुणे जिले से जुड़े चर्चित नसरापुर दुष्कर्म और हत्या मामले में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। चार साल की बच्ची के साथ हुए इस जघन्य अपराध ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत...
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले से जुड़े चर्चित नसरापुर दुष्कर्म और हत्या मामले में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। चार साल की बच्ची के साथ हुए इस जघन्य अपराध ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत चले इस मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।
तेज सुनवाई के कारण चर्चा में रहा मामला
इस केस को महाराष्ट्र के हाल के वर्षों के सबसे तेजी से निपटाए गए मामलों में गिना जा रहा है। अपराध की घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और महज 15 दिनों के भीतर करीब 1200 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी। इसके बाद विशेष अदालत में रोजाना इन-कैमरा सुनवाई हुई, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।
कोर्ट ने माना सबूतों की कड़ी मजबूत
स्पेशल जज एस.आर. सालुंखे की अदालत ने 25 जून को आरोपी भीमराव कांबले को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य और फोरेंसिक साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और आरोपी के खिलाफ मजबूत आधार तैयार करते हैं। सजा के निर्धारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में रखते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और अन्य परिस्थितियों को आधार बनाकर नरमी बरतने की अपील की थी।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में फैला था आक्रोश
यह मामला 1 मई 2026 को सामने आया था। नसरापुर क्षेत्र में अपने परिजनों के घर के बाहर खेल रही चार वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई थी। बाद में पुलिस जांच के दौरान आरोपी की पहचान हुई और उसे हिरासत में लिया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच एजेंसियों ने तकनीकी, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों को जुटाकर तेजी से कार्रवाई की। राज्य सरकार ने भी मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया था।
55 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
मुकदमे के दौरान अदालत ने 55 गवाहों के बयान दर्ज किए। अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस 21 जून को पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया और 29 जून को सजा सुनाते हुए उसे मृत्युदंड देने का आदेश दिया।
यह मामला अपनी तेज जांच, शीघ्र सुनवाई और कम समय में आए फैसले के कारण महाराष्ट्र के हालिया न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में दर्ज किया जाएगा। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए फैसले का स्वागत किया है।