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वह किस बात के जगद्गुरु ? रामभद्राचार्य जी को लौटा देनी चाहिए पद्मश्री उपाधि : दिनेश फलाहारी महाराज

जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) के तरफ से संत प्रेमानंद महाराज (Saint Premanand Maharaj) पर गलत टिप्पणी से वृंदावन संत समाज में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। संत समाज ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya)  जी ने प्रेमानंद महाराज (Saint Premanand Maharaj)  पर गलत टिप्पणी की है।

By santosh singh 
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मथुरा: जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) के तरफ से संत प्रेमानंद महाराज (Saint Premanand Maharaj) पर गलत टिप्पणी से वृंदावन संत समाज में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। संत समाज ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya)  जी ने प्रेमानंद महाराज (Saint Premanand Maharaj)  पर गलत टिप्पणी की है। इस बात को लेकर ब्रजभूमि के संत बेहद नाराज हैं और लगातार विरोध जता रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मस्जिद केस (Shri Krishna Janmabhoomi Temple Mosque Case) के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज (Dinesh Falahari Maharaj) ने कहा कि रामभद्राचार्य जी को अपनी पद्मश्री उपाधि (Padma Shri Title) लौटा देनी चाहिए।

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संत समाज ने कहा कि वह किस बात के जगद्गुरु हैं? उन्हें ज्ञान का अहंकार हो गया है। एक संत का कर्तव्य है कि वह सबको गले लगाए, न कि किसी दूसरे संत को अपमानित करे। संत रास बिहारी दास महाराज ने कहा कि रामभद्राचार्य जी ने प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj)  को नीचा दिखाने के लिए जो शब्द कहे हैं, वह बहुत गलत हैं। संत समाज इसकी निंदा करता है।

उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj)  हमेशा पाखंडियों को आईना दिखाते हैं। इसके साथ ही सच्चाई के साथ भक्तों को राह दिखाते हैं। वहीं संत मोहित जी महाराज ने कहा कि प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj)   कभी किसी संत की बुराई नहीं करते। वह युवाओं को सनातन धर्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं। उनकी वाणी से हमेशा धर्म और भक्ति की सीख मिलती है।

भक्तों की भावनाओं से नहीं होना चाहिए खिलवाड़

संत समाज का कहना है कि भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। संतों को मिलजुलकर समाज को एकजुट करने का काम करना चाहिए। लेकिन रामभद्राचार्य जी के बयान ने संतों के बीच खाई पैदा कर दी है। ब्रजभूमि के संतों में इस बयान को लेकर भारी आक्रोश है। सभी संत एक स्वर में कह रहे हैं कि रामभद्राचार्य जी को इस पर माफी मांगनी चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा।

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