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बिहार में हार बाद ‘जयचंदों’ की पहचान में जुटी आरजेडी, बड़ा एक्शन लेने की तैयारी

RJD review meeting on defeat: बिहार विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद लालू परिवार में कलह कई दिनों तक सुर्खियों में बनी रही। इस विवाद में लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने कई गंभीर आरोप लगाए। खबर यह भी सामने आयी कि तेजस्वी यादव ने विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष बनने से इनकार कर दिया था। इन सभी घटनाक्रमों के बाद आरजेडी चुनाव में हार के जिम्मेदार 'जयचंदों' यानी भितरघातियों की पहचान करने में जुट गयी है।

By Abhimanyu 
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RJD review meeting on defeat: बिहार विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद लालू परिवार में कलह कई दिनों तक सुर्खियों में बनी रही। इस विवाद में लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने कई गंभीर आरोप लगाए। खबर यह भी सामने आयी कि तेजस्वी यादव ने विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष बनने से इनकार कर दिया था। इन सभी घटनाक्रमों के बाद आरजेडी चुनाव में हार के जिम्मेदार ‘जयचंदों’ यानी भितरघातियों की पहचान करने में जुट गयी है।

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जानकारी के मुताबिक, आरजेडी ने बुधवार से अपने प्रदेश कार्यालय में प्रमंडलवार जीते विधायकों और हारे हुए उम्मीदवारों के साथ बैठक शुरू कर दी है। जिसमें इनकी रिपोर्ट के आधार पर आरजेडी के भितरघातियों की लिस्ट तैयार की जाएगी। फिर उनसे सवाल-जवाब भी किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि दो चरणों की समीक्षा बैठक के बाद बड़े स्तर पर पार्टी विरोध कार्यो में संलिप्त नेताओं या कार्यकताओं को आरजेडी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। प्रमंडलवार बैठकें 4 दिसंबर तक चलेंगी।

बताया जा रहा है कि बैठक के पहले दिन मगध प्रमंडल के हारे-जीते उम्मीदवारों को बुलाया गया था। इस दौरान बैठक में आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, पूर्व मंत्री अब्दुलबारी सिद्दिकी, भोला यादव जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। पार्टी के उम्मीदवारों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की पूरी रिपोर्ट लिखित रूप से नेतृत्व को सौंपी। रिपोर्ट में उन नेताओं के नाम बताए गए जिन्होंने चुनाव के दौरान आरजेडी और गठबंधन के खिलाफ काम किया।

हार की समीक्षा के दूसरे चरण में 5 से 9 दिसम्बर के बीच आरजेडी के जिलाध्यक्षों, प्रधान महासचिव और प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होगी। इन बैठकों में उम्मीदवारों की ओर से दिये गए नामों के बारे में पार्टी के पदधारकों से राय ली जाएगी। साथ ही जिन नेताओं का नाम पार्टी विरोधी काम करने वालों की लिस्ट में होगा, उनसे भी इस बारे में राय की ली जाएगी। अगर वह संतोषप्रद जवाब नहीं देते तो उन्हें पार्टी से बाहर किया जाएगा।

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