सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन भक्त संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन के विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। तो आइये जानते हैं कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी ।
उदया तिथि
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी तिथि 4 फरवरी 2026 को देर रात 12 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी। जबकि, इस तिथि की समाप्ति 5 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। इसलिए उदया तिथि के मुताबिक, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी 2026 को ही रखा जाएगा।
मुहुर्त
पंचांग की गणना के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। जबकि, अभिजीत मुहुर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
चंद्रोदय
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है। 5 फरवरी 2026 को चंद्रोदय का सही समय रात 09 बजकर 35 मिनट है।