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सूर्या ब्रिगेड ने न हाथ मिलाया और न मिलाई आंख और मैदान में चटा दी धूल, ति​लमिलाए राशिद लतीफ, बोले- पहलगाम में जंग लड़ लेते, वह भी तो पूरी तरह नहीं लड़े…

एशिया कप (Asia Cup) के रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में जीत-हार से ज्यादा चर्चा हाथ नहीं मिलाने को लेकर हो रही है। हालांकि मुकाबला तो पूरी तरह एकतरफा रहा। भारत ने जीत दर्ज की, लेकिन उस जीत से ज्यादा चर्चा भारतीय कप्तान और खिलाड़ियों के पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाने की हो रही है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। एशिया कप (Asia Cup) के रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में जीत-हार से ज्यादा चर्चा हाथ नहीं मिलाने को लेकर हो रही है। हालांकि मुकाबला तो पूरी तरह एकतरफा रहा। भारत ने जीत दर्ज की, लेकिन उस जीत से ज्यादा चर्चा भारतीय कप्तान और खिलाड़ियों के पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाने की हो रही है। इसके विरोध में सलमान अली आगा (Salman Ali Agha) ने पोस्ट-मैच प्रजेंटेशन (Post-Match Presentation) का बहिष्कार किया। पाकिस्तानी टीम ने रेफरी के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

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पाकिस्तान के तमाम पूर्व क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ब्रिगेड (Suryakumar Yadav Brigade) के फैसले से बौखलाए हुए हैं। पूर्व कप्तान राशिद लतीफ (Rashid Latif) ने तो तिलमिलाहट में यहां तक कह दिया कि अगर मामला पहलगाम से ही जुड़ा है तो जंग ही लड़ लेते। वो भी नहीं की पूरी तरह से।

देश में पाकिस्तान के साथ मैच को लेकर सोशल मीडिया पर आक्रोश, बॉयकॉट ट्रेंड और यहां तक खिलाड़ियों के लिए तमाम अपशब्दों के इस्तेमाल के बीच भारतीय टीम ने शानदार काम किया। कप्तान हो या खिलाड़ी, खेलना या न खेलना तो उनके नियंत्रण में नहीं था। खेलने का फैसला तो बीसीसीआई (BCCI) का था और सरकार से हरी झंडी थी। कप्तान और खिलाड़ियों के नियंत्रण में जो था, उसे उन्होंने बखूबी किया। एकतरफा अंदाज में पहले पाकिस्तान को मैदान में पीटा, फिर अपना संदेश भी साफ-साफ दे दिया। ‘दिल मिले ना मिले, हाथ मिलाते रहिए’ की रवायत का क्या मतलब? पाक खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया और मैच के बाद सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने जीत को पहलगाम हमले में मारे गए लोगों और पीड़ित परिवारों को समर्पित किया।

भारतीय टीम के इस कदम से पाकिस्तान का तिलमिलाना लाजिमी था। एक तो मैच हारे, ऊपर से भारतीय टीम ने कोई भाव नहीं दिया। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर मामला पहलगाम से जुड़ा है तो जंग लड़ो। ये कहते हुए वो शायद भूल गए कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद महज कुछ घंटों में पाकिस्तान कैसे घुटनों पर आ गया और वहां के डीजीएमओ भारतीय समकक्ष से सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगे थे। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ने कहा कि ‘युद्ध या पहलगाम हमले को लेकर आपकी आपत्तियां जायज हैं। लेकिन जब आप ग्राउंड पर आते हैं तो खेल को सही तरीके से खेलिए। अगर पाकिस्तान पहलगाम हमले में शामिल है तो जो जिम्मेदार हैं, उन्हें पकड़िए। जंग ही कर लेते, वो भी नहीं की पूरी तरह से। भारत को युद्ध लड़ना चाहिए था, उन्हें पीछे नहीं हटना चाहिए था।

लतीफ ने ये भी कहा कि युद्ध तो पहले भी हुए हैं,लेकिन हमने हमेशा हाथ मिलाए हैं। ये चीजें जिंदगीभर के लिए एक धब्बा बनी रहेंगी। अपने तमाम इंटरव्यू में सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) , जावेद मियांदाद (Javed Miandad) के बारे में बोलते थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं कहा कि हाथ नहीं मिलाएंगे। हम अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर सोचता हूं कि जो हुआ वो ठीक नहीं था। इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने पीटीवी स्पोर्ट्स से बातचीत में कहा था कि क्रिकेट मैच है, उसे पॉलिटिकल मत बनाओ। झगड़ा तो हर घर में होता है।

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