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Sweet And Sour Hisalu : हिसालू फल सैकड़ों बीमारियों से बचने का है अचूक उपाय, औषधीय गुणों से भरपूर है

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अनेक प्रकार के औषधि पाई जाती हैं, जिसमें से एक रसबेर्री यानी कि हिसालू हिमालय रसबेर्री है जो फल के साथ साथ एक महत्वपूर्ण औषधि भी है।

By अनूप कुमार 
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Sweet and sour Hisalu : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अनेक प्रकार के औषधि पाई जाती हैं, जिसमें से एक रसबेर्री यानी कि हिसालू हिमालय रसबेर्री है जो फल के साथ साथ एक महत्वपूर्ण औषधि भी है। कुमाऊं और गढ़वाल का पहाड़ी क्षेत्र अनेक प्राकृतिक जड़ी-बूटियों एवं औषधीय गुणों से युक्त फलों से भरा पड़ा है। काफल की तरह ही जेठ-असाड़ माह में पहाड़ की  धरती पर छोटी कांटेदार झाड़ियों में उगने वाला एक जंगली रसदार हिसालू भी स्वादिष्ट फल है। हिसालू मुख्य रूप से अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ के अनेक स्थानों में पाया जाता है। यो कांटेदार छोटी-छोटी झाड़ियों वाला होता है, जो मध्य हिमालय में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

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हिसालू के फायदे

हिसालू फलों में पर्याप्त मात्र में एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा होने की वजह से ये शरीर के लिए काफी गुणकारी माना जाता है। हिसालू की ताजी जड़ के रस का प्रयोग करने से पेट संबंधित बीमारियों दूर हो जाती हैं और इसकी पत्तियों की ताजी कोपलों को ब्राह्मी की पत्तियों और दूर्वा (Cynodon Dactylon) के साथ मिलाकर स्वरस निकालकर पेप्टिक अल्सर की चिकित्सा की जाती है। इसके फलों से प्राप्त रस का प्रयोग बुखार, पेट दर्द, खांसी औऱ गले के दर्द में बड़ा ही फायदेमंद होता है।

इसकी छाल का प्रयोग तिब्बती चिकित्सा पद्धति में भी सुगंधित और कामोत्तेजक प्रभाव के लिए किया जाता है। इस फल के नियमित उपयोग से किडनी-टोनिक के रूप में भी किया जाता है और साथ ही साथ नाडी-दौर्बल्य, अत्यधिक है।

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