मामला OAE एवं ASSR के साथ Brain Stem Evoked Response Audiometer (BERA) की खरीद से संबंधित है। पत्र में इस खरीद को लेकर आसन्न घोटाले की आशंका जताते हुए संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई की बात कही गयी है। इस पूरे मामले में विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप गुप्ता की भूमिका बताई गयी है और उनके द्वारा किए जा रहे नियम विरूध काम को घृणित और धोखाधड़ीपूर्ण बताया गया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसके बाद से तमाम सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, प्रदेश में चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी एक प्रक्रिया में घोटाला सामने आया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अनु सचिव रविकेश चन्द्र ने यूपीएमएससीएल के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप गुप्ता पर के कामकाज पर सवाल उठाया है। साथ ही कहा कि, इनके घृणित और धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के अनु सचिव रविकेश चन्द्र ने यूपीएमएससीएल के प्रबंध निदेशक को 12 अगस्त को पत्र लिखा है, जिसमें टेंडर संख्या GeM/2025/B/6950172 के तहत BERA की खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर तत्काल कार्रवाई और स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने को कहा है।
मामला OAE एवं ASSR के साथ Brain Stem Evoked Response Audiometer (BERA) की खरीद से संबंधित है। पत्र में इस खरीद को लेकर आसन्न घोटाले की आशंका जताते हुए संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई की बात कही गयी है। इस पूरे मामले में विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप गुप्ता की भूमिका बताई गयी है और उनके द्वारा किए जा रहे नियम विरूध काम को घृणित और धोखाधड़ीपूर्ण बताया गया है।

कई पत्रों के बाद भी मांगी गई स्पष्ट आख्या
अनु सचिव ने अपने पत्र में शासन के पूर्व पत्रों और अनुस्मारकों का भी हवाला दिया है। इसमें 22 अप्रैल, 29 अप्रैल, 21 मई, 29 जून और 20 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र शामिल हैं। पत्र के मुताबिक, इन पत्रों के माध्यम से यूपीएमएससीएल के उक्त टेंडर और BERA की खरीद से जुड़े मामले में कार्रवाई की मांग की गई थी।
पत्र में हेमन्त सेन के ई-मेल तथा Myrtill Industries के 31 मार्च 2026 के ई-मेल पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर शासन की ओर से संबंधित प्रकरण की जांच कर स्पष्ट आख्या शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
शासन ने मांगी रिपोर्ट
12 अगस्त को जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को पूर्व में भेजे गए पत्रों का संज्ञान लेते हुए प्रश्नगत प्रकरण के परीक्षण के बाद स्पष्ट आख्या शासन को शीघ्र उपलब्ध कराने का कष्ट किया जाए।
एसीएस की बात भी नहीं मानते हैं MD उज्जवल कुमार
यही नहीं, UPMSCL के चेयरमैन अमित घोष की बात को भी MD उज्जवल कुमार नहीं मानते हैं। चेयरमैन की लिखित टिप्पणियों का पालन ही भी नहीं करते हैं। ऐसे में लगातार सवाल उठते रहते हैं कि, आखिर उज्जवल कुमार आरोपों से घिरे UPMSCL के कर्मचारी और अधिकारियों को क्यों बचा रहे हैं। वहीं, अब महाप्रबंधक प्रदीप गुप्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे में देखना होगा कि, क्या उज्जवल कुमार इनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे या फिर इन कागजों को फाइलों में बंद कर देंगे।
दवा माफिया और भ्रष्टाचारियों का बोलबाला
क्या दवा माफिया और भ्रष्टाचारियों का इतना रसूख हो गया कि, वो मेडिकल कॉर्पोरेशन से लेकर स्वास्थ्य विभाग में जो बजट का आंवटन है उसमें भी उन्हीं के कहने पर सबकुछ हो रहा है। पर्दाफाश की टीम बहुत जल्दी इन सबके नाम का खुलासा करेगी।