5 दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज भूतकाल बन गई है। तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर की कल्पना करने वाले सारे लोग आज हथियार डालकर, सरेंडर करके main stream में शामिल होने के लिए आगे बढ़े हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर में भी लगभग 10 हजार युवाओं ने हथियार डाले हैं। 14 से ज्यादा समझौते भारत सरकार ने उनके साथ किए हैं और आज पूर्वोत्तर भी एक प्रकार से विकास के रास्ते पर चल पड़ा है।
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पणजी, गोवा में नशीले पदार्थों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा, जब से नरेंद्र मोदी जी इस देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा को सुद्रढ़ करने के लिए ढेर सारे कदम उठाए हैं। जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब देश के सामने 3 विकराल समस्याएं थी। जम्मू-कश्मीर और वहां बढ़ता आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में अनेक हथियारबंद समूह पूर्वोत्तर को अशांत बनाए हुए थे।
उन्होंने कहा, 2019 से लेकर अब तक पीछे मुड़कर देखते हैं, तो मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद अलगाववाद की भावना में बहुत कमी आई है। आतंकवाद के आंकड़ें धीरे धीरे सिकुड़कर जीरो की ओर जाते हुए दिखाई पड़ते हैं और जम्मू कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है और जम्मू कश्मीर एवं भारत के बाकी हिस्सों के बीच में जो मन की दूरी थी, उसको मिटाने के भी सफल प्रयास हुए हैं।
5 दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज भूतकाल बन गई है। तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर की कल्पना करने वाले सारे लोग आज हथियार डालकर, सरेंडर करके main stream में शामिल होने के लिए आगे बढ़े हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर में भी लगभग 10 हजार युवाओं ने हथियार डाले हैं। 14 से ज्यादा समझौते भारत सरकार ने उनके साथ किए हैं और आज पूर्वोत्तर भी एक प्रकार से विकास के रास्ते पर चल पड़ा है।
गृह मंत्री ने कहा, 2019 के बाद हमने देश में अपराध करके भागे भगौड़े अपराधियों के लिए भी अभियान चलाया। 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगौडों का प्रत्यर्पण करके हमने उन्हें भारत की अदालतों के सामने उन्हें लाने का काम किया है। 2019 से 2026 तक लगभग 17,874 करोड़ की इन भगौड़ों की संपत्ति सील हो चुकी है और नई न्याय संहिताओं ने इनपर कानूनी कार्यवाही करने का भी एक रास्ता खोला है। हमने साइबर अपराधों के लिए भी एक व्यवस्थित तंत्र बनाया है, मोदी जी स्वयं इसकी निगरानी भी कर रहे हैं। आज 1930 साइबर अपराधों से बचने के लिए एक रामबाण इलाज बनकर आगे बढ़ा है।
साथ ही कहा, 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लिए हमने एक रोडमैप बनाया है। हम सब जानते हैं कि नारकोटिक्स एक ऐसा अपराध है, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को नष्ट करने का काम करता है और नारकोटिक्स के माध्यम से अर्जित डर्टी मनी का उपयोग आतंकवाद के लिए भी होता है। उन्होंने कहा, 2014 के पहले टुकड़े-टुकड़े में ये लड़ाई लड़ी जाती थी। छोटी जब्ती, छोटे आरोपियों को पकड़कर संतुष्ट हो जाते थे। हमने 2019 से इस विषय को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्राथमिकता का विषय बनाया। नार्को के खिलाफ हमारी लड़ाई फाइलों और अलग अलग एजेंसियों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और सतत अभियान बने। इसलिए हमने कार्यवाही की।
2004 से 2014 तक कांग्रेस के शासनकाल के दौरान जब्त ड्रग्स की मात्रा 26 लाख किलोग्राम थी। जबकि 2014 से 2026 के बीच 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से ज्यादा ड्रग्स पकड़ा गया है। इसका मूल्य कांग्रेस के शासन में 40 हजार करोड़ था और मोदी जी के नेतृत्व में अभियान चलाकर जो ड्रग पकड़ा गया, उसका मूल्य 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये है। 2026 से 2029 को हमने मिशन मोड़ अवधि के रूप में चिन्हित किया है। समय सीमाएं तय की हैं। अलग-अलग मंत्रालयों को उत्तरदायी बनाया गया है। मापनीय परिणाम के लक्ष्य तय किये गए हैं। तिमाही समीक्षा और परिणाम आधारित जवाबदेही भी हम तय करने जा रहे हैं।