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बीजेपी ने 26,000 स्कूलों को बंद करके वहां शराब की दुकानें खोल दी : अखिलेश यादव

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गोमती नदी तट स्थित समाधि स्थल पहुंचकर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार एवं शिक्षाविद आचार्य नरेंद्र देव को नमन किया। इस मौके पर अखिलेश ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रदेश में 26000 स्कूल बंद करके वहां पर शराब की दुकानें खोल दीं।

By Abhimanyu 
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लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गोमती नदी तट स्थित समाधि स्थल पहुंचकर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार एवं शिक्षाविद आचार्य नरेंद्र देव को नमन किया। इस मौके पर अखिलेश ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रदेश में 26000 स्कूल बंद करके वहां पर शराब की दुकानें खोल दीं।

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लखनऊ में पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ” जो भारतीय जनता पार्टी का सदस्य है उसे चुनाव आयोग भारत का नागरिक मानता और वोटर मानता है… जब किसी को नहीं पता था कि कितने वोट कटे हैं तो मुख्यमंत्री जी को कैसे पता चल गया? कौन उन्हें बता रहा था? … उन्होंने हमसे ‘स्वच्छ भारत’, 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और ‘डिजिटल इंडिया’ का वादा किया था। लेकिन दूसरी तरफ, 26,000 स्कूल बंद कर दिए गए हैं।”

अखिलेश ने आगे कहा, “हमने सुना है कि जिन जगहों पर कभी ये 26,000 स्कूल हुआ करते थे, वहां अब शराब की दुकानें खुलने जा रही हैं। शिक्षा से इंसान का जीवन बेहतर होता है, लेकिन बीजेपी ने 26,000 स्कूलों को बंद करके उनकी जगह शराब की दुकानें खोल दी हैं… हमारी पार्टी के कार्यकर्ता एकजुट हैं और बीजेपी का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। अगर इन लोगों को उत्तर प्रदेश से हटा दिया जाए, तो ये भारत से भी हट जाएंगे…”

मॉक पार्लियामेंट पर दी प्रतिक्रिया

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आज आयोजित हो रही ‘नकली संसद’ (मॉक पार्लियामेंट) पर अखिलेश ने कहा, “चूंकि सरकार बात नहीं सुन रही है, इसलिए यह ‘नकली संसद’ आयोजित की जा रही है। इसका मकसद यह संदेश देना है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बन गया है। आज, जब हम आचार्य नरेंद्र देव को याद कर रहे हैं, हमारी पार्टी के सांसद इस ‘नकली संसद’ में हिस्सा ले रहे हैं।

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बीजेपी इतनी घबराई हुई क्यों है? अगर बीजेपी संसद में लिए गए फैसलों को ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं कर रही है, तो उसने महिलाओं के आरक्षण पर पहले से पारित कानून को अब तक लागू क्यों नहीं किया? वह इस मुद्दे पर बहस क्यों नहीं कराना चाहती? हमने देखा था कि पिछले लोकसभा सत्र के दौरान क्या हुआ था। जिन लोगों ने भक्तों द्वारा दिए गए दान और लोगों की आस्था से जुड़े चढ़ावे को ही हड़प लिया हो… उनसे हम लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की क्या उम्मीद कर सकते हैं?”

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