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फ्रांस साइबर अटैक की घटना भारत समेत कई देशों के लिए बड़ी चेतावनी! हम कितने हैं तैयार?

France Cyberattack : पिछले करीब 3 दशक में तकनीकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी आविष्कारों ने विकास की गति को बुलंदियों पर पहुंचाया है। अब सभी काम बेहद आसान और कम समय में हो रहे हैं। जिसमें डिजिटलाइजेशन की भूमिका सबसे अहम रही है। वहीं, एआई के माध्यम से रोबोट में सोचने और फैसले की क्षमता भी विकसित की जा रही और रिमोट-कंट्रोलर या एप के माध्यम से मशीनों को कहीं भी बैठे कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि, इसका दूसरा पहलु भी है, जो बेहद डरावना है। जिसमें दुनिया के किसी कोने में बैठा एक अपराधी लाखों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसका ताजा उदाहरण- फ्रांस में साइबर अटैक की घटना है। 

By टीम पर्दाफाश 
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Cyberattack Concerns: पिछले करीब 3 दशक में तकनीकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी आविष्कारों ने विकास की गति को बुलंदियों पर पहुंचाया है। अब सभी काम बेहद आसान और कम समय में हो रहे हैं। जिसमें डिजिटलाइजेशन की भूमिका सबसे अहम रही है। वहीं, एआई के माध्यम से रोबोट में सोचने और फैसले की क्षमता भी विकसित की जा रही और रिमोट-कंट्रोलर या एप के माध्यम से मशीनों को कहीं भी बैठे कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि, इसका दूसरा पहलु भी है, जो बेहद डरावना है। जिसमें दुनिया के किसी कोने में बैठा एक अपराधी लाखों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसका ताजा उदाहरण- फ्रांस में साइबर अटैक की घटना है।

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पूरे फ्रांस में पिछले हफ्ते की शुरुआत में सैकड़ों किराना स्टोरों में हैकरों ने रेफ्रिजरेटरों पर कंट्रोल कर लिया। जिसके बाद, सुपरमार्केट के कर्मचारियों को फ्रीजर के नीचे पानी जमा होने और करोड़ो के उत्पादों के खराब होने से भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। इन सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर के सेक्शन ऑनलाइन एक्सेस किए जा सकने वाले कंट्रोलर से संचालित होते हैं, जिससे रखरखाव करने वाली कंपनियां दूर से ही तापमान को समायोजित कर सकती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस में हैकर्स ने कम से कम तीन कंपनियों के कंट्रोलर में सेंध लगाई। जिनमें डेनिश कंपनी डैनफॉस, अमेरिकी कंपनी कोपलैंड और डिक्सेल शामिल रहीं। हैकर्स ने रेफ्रिजरेटरों के अंतर्निर्मित डीफ़्रॉस्ट फ़ंक्शन का दुरुपयोग करके और तापमान को बढ़ने से रोकने वाली सीमाओं को हटाकर, रात भर में रेफ्रिजरेटरों को पिघला दिया। सोमवार की रात लगभग छह घंटे तक डिस्प्ले कैबिनेट का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस (122 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया, और कुछ में आग भी लग गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साइबर अटैक में सटीक नुकसान का पता नहीं है, लेकिन प्रभावित सुपरमार्केट चेन में से कुछ ने बताया है कि उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। ये नुकसान कई मिलियन यूरो” तक हो सकता है। एक छोटे सुपरमार्केट को हजारों यूरो का नुकसान हो सकता है, जबकि एक बड़े स्टोर को 200,000 यूरो (यानी 2,12,34,800 रुपये से अधिक) से भी ज्यादा का नुकसान हो सकता है। 400 से 480 से अधिक सुपरमार्केट्स और आउटलेट्स इस हमले की चपेट में आए। इनमें इंटरमार्शे, नेटो, कोऑपरेटिव यू, कैरफोर और मोनोप्रिक्स जैसी बड़ी चेन शामिल हैं। हालांकि, फ्रांस प्रशासन की ओर से हैकर्स की ओर से डिमांड नहीं की गयी, जो आम तौर की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फ्रांस जैसा विकसित देश, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत तकनीकी देश माना जाता है। वहां ऐसी घटना हो सकती है तो बाकी विकासशील देशों की साइबर सुरक्षा ऐसे हमलों का सामना कर पाएगी?

भारत के लिए बड़ी चेतावनी!

पिछले 10 साल में भारत ने डिजिटलाइजेशन की ओर तेजी से रुख किया है और लोगों ने कैशलेस व्यवस्था को जबरदस्त तरीके से अपनाया है। लेकिन, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि देश में साइबर क्राइम एक बड़ी चिंता के रूप में उभरा है। कुछ महीने पहले सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में भारत के लोगों ने साइबर फ्रॉड के कारण 52 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा गवां दिए हैं। इस दौरान साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख हो गयी। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर दिन लगभग 4,200 से 7,000 से अधिक साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज की जाती हैं। जिनमें अलग-अलग तरीके से ठगी के मामले सामने आए हैं।

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हालांकि, भारत में साइबर सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं है। अगर फ्रांस जैसा साइबर अटैक भारत के किसी क्षेत्र में होता है तो बड़ा नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है। बीते कुछ सालों में, देश की सरकारी वेबसाइट्स, मंत्रालयों, पोर्टल, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक डेटाबेस, अस्पताल और हेल्थकेयर सिस्टम हैकर्स के मुख्य लक्ष्यों में शामिल रहे हैं। कई बार रेलवे की टिकट बुकिंग की IRCTC वेबसाइट हैक हो चुकी है। इसके अलावा, बैंक, म्यूचुअल फंड (जैसे Nippon India), डिजिटल पेमेंट और क्रिप्टो एक्सचेंज (जैसे WazirX) पर लगातार सेंधमारी की कोशिशें होती रही हैं।

डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया व अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु, नई दिल्ली (Delhi-NCR), मुंबई, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और कोलकाता साइबर अपराधों के प्रमुख केंद्र और हैकर्स के निशाने पर रहने वाले शीर्ष शहर हैं। यानि ये सिर्फ फ्रांस जैसे देशों के लिए ही नहीं भारत के लिए भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में भारत को अपने साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। तभी ऐसे संभावित हमलों से बचा जा सकता है।

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