जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) पर बिना हिसाब-किताब खर्च की गई करोड़ों की धनराशि व घपलेबाजी के मामले में सपा नेता आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें और बढ़नी तय हैं। ईडी (ED) ने आजम खान (Azam Khan) और उनके सगे-सम्बंधियों के खिलाफ जो प्राथमिकी दर्ज कराई है उसमे लगी धाराओं में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) पर बिना हिसाब-किताब खर्च की गई करोड़ों की धनराशि व घपलेबाजी के मामले में सपा नेता आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें और बढ़नी तय हैं। ईडी (ED) ने आजम खान (Azam Khan) और उनके सगे-सम्बंधियों के खिलाफ जो प्राथमिकी दर्ज कराई है उसमे लगी धाराओं में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इन धाराओं में पुलिस को आरोपितों की गिरफ्तारी का भी अधिकार है।
मंगलवार को अजीमनगर थाने में ईडी (ED) की ओर से आजम खान, मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस एंड एस इंटरप्राइजेज, एसएस एसोसिएट व अन्य के खिलाफ सरकारी धन के गबन व धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्रकरण की विवेचना सीओ टांडा पंकज पंत कर रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि विवेचना शुरू कर दी गई है। साक्ष्य संकलन का काम चल रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
अधिवक्ता संदीप सक्सेना के अनुसार ईडी (ED) की ओर से दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 ‘आपराधिक साजिश’ से संबंधित है। इस धारा के तहत सजा साजिश में शामिल अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है कि वह कितना बड़ा या छोटा है। बीएनएस की धारा 316(5) के तहत यदि कोई लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी, दलाल या अभिकर्ता अपने व्यवसाय के दौरान सौंपी गई संपत्ति का आपराधिक विश्वासघात करता है, तो उसे 10 साल या आजीवन कारावास का दंड दिया जाता है।
इसी तरह बीएनएस (BNS) की धारा 318(4) धोखाधड़ी और संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को बेईमानी से हड़पने से संबंधित है। इसमें सात साल तक की जेल (कारावास) की सजा हो सकती है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की तीन धाराएं लगी हैं। इनमे धारा 7 लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेने या अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित है। इसमें सात वर्ष तक कारावास हो सकता है।
धारा 13 (2) लोक सेवक द्वारा किए जाने वाले ‘आपराधिक अवचार’ के लिए है। इसमें कम से कम 4 वर्ष की जेल का प्रविधान है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह धारा 13 (1) (d) के तहत यदि कोई लोक सेवक अपने कार्यकाल के दौरान बेईमानी से अवैध रूप से खुद को समृद्ध करता है, या उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति पाई जाती है तो उसे दस वर्ष की सजा हो सकती है। सात वर्ष से ऊपर की सजा वाले मामले में पुलिस को आरोपितों को गिरफ्तार करने का अधिकार है। हालांकि, विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर धाराएं कम या बढ़ भी सकती हैं
प्राथमिकी में ये हैं आरोप
प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय परिसर में 85.81 करोड़ रुपये के कार्य सरकारी धन से कराए गए। विश्व विद्यालय के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये बताई है। जबकि ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्शाए जाने का उल्लेख किया है। करीब 416.14 करोड़ रुपये के अंतर का स्पष्टीकरण नहीं मिलने का दावा किया गया है।
ईडी ने सरकारी धन से विश्वविद्यालय परिसर में काम कराए जाने के आरोपों के तहत तीन मदों का उल्लेख किया है। एक ठेकेदार के बयान में सरकारी ठेकों से जुड़े 55.8 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई। इसके अलावा, भव्य पंडाल, छात्रावास और अस्पताल के लिए 23.41 करोड़ रुपये की सरकारी मंजूरी का जिक्र है। यह भी कहा गया है कि विधायक/एमएलसी क्षेत्र विकास निधि से विश्वविद्यालय परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए गए।