उत्तर प्रदेश में भूमिहीन महिला श्रमिकों की स्थिति को लेकर सामाजिक समरसता मंच, अवध प्रांत ने एक शोध-प्रतिवेदन जारी किया है। शुक्रवार को लखनऊ के विश्व संवाद केंद्र, जियामऊ में हुई प्रेसवार्ता में रिपोर्ट के जरिए भूमि स्वामित्व, मजदूरी, गरीबी और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति सामने रखी गई...
लखनऊ, पर्दाफाश। उत्तर प्रदेश में भूमिहीन महिला श्रमिकों की स्थिति को लेकर सामाजिक समरसता मंच, अवध प्रांत ने एक शोध-प्रतिवेदन जारी किया है। शुक्रवार को लखनऊ के विश्व संवाद केंद्र, जियामऊ में हुई प्रेसवार्ता में रिपोर्ट के जरिए भूमि स्वामित्व, मजदूरी, गरीबी और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति सामने रखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सिर्फ 7.6 प्रतिशत महिलाओं के नाम कृषि भूमि दर्ज है, जबकि करीब 85 प्रतिशत महिला श्रमशक्ति खेतों में काम करती है। पिछले एक साल में काम करने वाली महिलाओं में 18 प्रतिशत से भी कम को नकद मजदूरी मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। मध्य, पूर्वी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों में निर्धनता दर 73.4 से 89.8 प्रतिशत तक बताई गई है।
रिपोर्ट में महिला साक्षरता दर 66 प्रतिशत के मुकाबले पुरुषों की 82 प्रतिशत बताई गई है। साथ ही एनीमिया, बच्चों में कुपोषण और स्वास्थ्य बीमा की कमी को भी गंभीर समस्या बताया गया है। केवल 16 प्रतिशत भूमिहीन परिवारों के पास स्वास्थ्य बीमा होने का दावा किया गया है।
शोधकर्ता डॉ. चंद्रकांता के. माथुर ने कहा, जब तक भूमिहीन किसान महिला को ‘अन्नदाता’ के रूप में मान्यता, भूमि, मजदूरी और निर्णय में उसका वाजिब हक नहीं मिलता, तब तक ग्रामीण भारत का सशक्तिकरण अधूरा रहेगा। नया भारत वह होगा जिसमें खेत की मेड़ पर खड़ी वह महिला भी, जिसके नाम एक इंच जमीन नहीं है, उतने ही आत्मविश्वास से नीति-निर्धारण की मेज पर अपनी बात रख सके।
सामाजिक समरसता गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक के. श्याम प्रसाद ने अनुसूचित जाति और वंचित वर्ग की भूमिहीन महिलाओं के लिए अलग कल्याणकारी प्रकोष्ठ बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, किसान परिवार की महिला हो या भूमिहीन खेत मजदूर परिवार की महिला-दोनों एक ही खेत, एक ही परिश्रम और एक ही सपने की साझेदार हैं। जब तक ग्रामीण भारत की ये दोनों महिला-शक्तियां एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयात्री मानकर आगे नहीं बढ़ेंगी, तब तक सामाजिक समरसता का सपना अधूरा रहेगा।
मंच ने मनरेगा में प्राथमिकता, समान काम के बदले समान मजदूरी, “खेतमजदूर कार्ड” के जरिए DBT और भूमिहीन परिवारों के लिए विशेष ऋण व बीमा सुविधा की मांग की। प्रेसवार्ता में राजकिशोर, अविशा रवि और बृजनन्दन राजू मौजूद रहे।