1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. ‘वंदे मातरम्’ गीत गाने के लिए हमको नहीं किया जा सकता मजबूर , क्योंकि संविधान से हर नागरिक को मिली है धार्मिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : मौलाना अरशद मदनी

‘वंदे मातरम्’ गीत गाने के लिए हमको नहीं किया जा सकता मजबूर , क्योंकि संविधान से हर नागरिक को मिली है धार्मिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : मौलाना अरशद मदनी

वंदे मातरम् (Vande Mataram) गीत को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि उन्हें वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है और मुसलमान अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। वंदे मातरम् (Vande Mataram) गीत को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि उन्हें वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है और मुसलमान अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।

पढ़ें :- Gujarat Local Body Result 2026 : नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सभी 15 निगमों पर जमाया कब्जा, ऐतिहासिक जीत का मना जश्न

बता दें कि वंदे मातरम् (Vande Mataram) के 150 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को लोकसभा में चर्चा की शुरुआत की। इस बीच अरशद मदनी (Arshad Madani) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम् (Vande Mataram) का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर दुर्गा माता से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही मां मैं तेरी पूजा करता हूं। यही वंदे मातरम (Vande Mataram) का अर्थ है।

पढ़ें :- राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, BJP-TMC में है मिलीभगत, बोले- ‘मैं बेल पर, 36 केस और 55 घंटे पूछताछ, ममता पर मेहरबानी क्यूं?

मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने वंदे मातरम् (Vande Mataram) का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।

अरशद मदनी (Arshad Madani) ने कहा, कि वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। उन्होंने कहा कि किसी मुसलमान को उसकी आस्था के खिलाफ नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

वंदे मातरम पर संसद में विशेष चर्चा में भाग लेते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी (MP Asaduddin Owaisi) ने कहा कि भारत में आजादी इसलिए आई कि हमने मुल्क और मजहब को एक नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि हुकूमत इस पर जोर-जबर नहीं करे, अगर जबरदस्ती करेंगे तो यह संविधान के खिलाफ है।

ओवैसी ने कहा कि जिन्होंने जंग-ए-आजादी (Freedom War) में हिस्सा नहीं लिया, आज वे वतन से मोहब्बत की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभक्ति दिखानी है तो गरीबी खत्म की जाए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या वे वंदे मातरम् को वफादारी का टेस्ट बनाना चाहते हैं। उन्होंने वंदे मातरम् गाने या इसका उद्घोष करने के मुद्दे पर कहा कि हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, हम कुरान की भी इबादत नहीं करते और इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं।

पढ़ें :- पंजाब AAP विधायक राघव चड्डा के संपर्क में, संजय सिंह, बोले - ये झूठा प्रोपगैंडा, उनकी खुद की सदस्यता खत्म होने वाली है
इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...