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‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? जवाब मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’ पीएम मोदी के जॉर्जिया मेलोनी को दिए खास गिफ्ट के बाद पार्लेजी की टॉफी आई चर्चा में

आज भी मेलोडी सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि लोगों के बचपन की याद बन चुकी है। बाहर से कारमेल और अंदर से चॉकलेट से भरी यह टॉफी दशकों बाद भी लोगों की पसंद बनी हुई है। इन दिनों यह चॉकलेट एक बार फिर से चर्चा में है। जब पीएम मोदी (PM Modi) का इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Italian Prime Minister Giorgia Meloni) को मेलोडी चॉकलेट (Melody Chocolate) देते हुए वीडियो वायरल हुआ है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। आज भी मेलोडी सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि लोगों के बचपन की याद बन चुकी है। बाहर से कारमेल और अंदर से चॉकलेट से भरी यह टॉफी दशकों बाद भी लोगों की पसंद बनी हुई है। इन दिनों यह चॉकलेट एक बार फिर से चर्चा में है। जब पीएम मोदी (PM Modi) का इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Italian Prime Minister Giorgia Meloni) को मेलोडी चॉकलेट (Melody Chocolate) देते हुए वीडियो वायरल हुआ है। ऐसे में जानते हैं कि आखर कैसे मेलोडी इतना पॉपुलर हो गया और कब से इसका स्वाद भारत के लोगों को लुभा रहा है। 1980 के दशक में टॉफी और कैंडी का बाजार तेजी से बढ़ रहा था। उस समय कैडबरी (Cadbury) की ‘एक्लेयर्स’ बाजार में काफी लोकप्रिय थी। इसी बीच पार्ले ने मेलोडी (Melody) नाम की टॉफी लॉन्च की। कॉन्सेप्ट थोड़ा मिलता-जुलता था, बाहर कारमेल और अंदर चॉकलेट, लेकिन पार्ले (Parle) इसे अलग पहचान देना चाहता था।

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इस एक लाइन ने बदल दी मेलोडी की किस्मत

तब पार्ले की विज्ञापन एजेंसी ‘एवरेस्ट’ को यह जिम्मेदारी दी गई कि मेलोडी को बाकी टॉफियों से अलग कैसे दिखाया जाए। इसी दौरान जन्म हुआ उस लाइन का, जो आज भी लोगों की जुबान पर है – मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है? और फिल जवाब था -मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ! बस इस एक लाइन ने मेलोडी की किस्मत बदल दी। इस टैगलाइन को कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी (Sulekha Bajpai) ने लिखा था। वहीं ‘मेलोडी है चॉकलेटी’ वाला जिंगल भी लोगों के दिमाग में बस गया। पार्ले का मकसद लोगों में जिज्ञासा पैदा करना था। कंपनी चाहती थी कि लोग खुद सोचें कि आखिर इस टॉफी में ऐसा क्या खास है। यही रणनीति काम कर गई और मेलोडी बच्चों से लेकर युवाओं तक की पसंद बन गई।

खेल के मैदान से क्लासरूम तक… हर जगह गूंजा सवाल

मेलोडी के टीवी विज्ञापन काफी लोकप्रिय हुए। किसी विज्ञापन में कोच पूछता था कि मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है? तो कहीं टीचर यही सवाल करती दिखती थीं। हर बार जवाब एक ही होता था मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ! इन विज्ञापनों ने मेलोडी को सिर्फ टॉफी नहीं, बल्कि पॉप कल्चर का हिस्सा बना दिया।

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आज भी फिल्मों और मीम्स में भी जिंदा है मेलोडी

सालों बाद भी यह लाइन खत्म नहीं हुई। 2019 में फिल्म ‘छिछोरे’ में भी इसी डायलॉग को मजेदार अंदाज में इस्तेमाल किया गया। सोशल मीडिया पर भी यह लाइन मीम्स के जरिए लगातार वायरल होती रहती है। 40 साल बाद भी सवाल वही है – ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?’ और जवाब भी वही है – मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!’

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