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संसद का विशेष सत्र इसी माह बुला सकती है स​रकार: महिला आरक्षण और परिसीमन का बिल पास कराने की होगी कोशिश!

केंद्र सरकार महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े विधेयकों को दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से आई ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है...

By Harsh 
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नई दिल्ली।  केंद्र सरकार महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े विधेयकों को दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से आई ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार जरूरी समर्थन जुटाकर विधेयकों को पारित कराया जा सकेगा। हालांकि, सत्र की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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अप्रैल में क्यों अटक गया था सरकार का प्रस्ताव?

सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक शामिल थे। इनका मकसद लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने, निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से निर्धारण करने और महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।हालांकि 17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक जरूरी विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके बाद इससे जुड़े बाकी दोनों विधेयकों पर भी आगे कार्रवाई नहीं हुई।

लोकसभा और राज्यसभा में कितना समर्थन जरूरी?

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सामान्य विधेयकों से अधिक समर्थन की जरूरत होती है। लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 164 मतों का आंकड़ा इस विधेयक के लिए विशेष बहुमत के आकलन में इस्तेमाल किया जा रहा है। वास्तविक जरूरत सदन में मौजूद सदस्यों और मतदान की स्थिति पर भी निर्भर करती है।

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सरकार की रणनीति में विपक्षी दलों और छोटे राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाना अहम है। खबरों के मुताबिक, केंद्र डीएमके के 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए भी बातचीत कर रहा है। लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके पहले विरोध जता चुकी है, इसलिए उसका समर्थन अभी तय नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक समीकरणों में बदलाव से बढ़ी उम्मीद

अप्रैल में विधेयक गिरने के बाद संसद में दलों की स्थिति में कुछ बदलाव हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद अलग बैठने लगे हैं और उन्होंने नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़ने का दावा किया है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिलने की खबर आई थी। इन बदलावों से सदन में दलों की स्थिति और संभावित समर्थन के समीकरण प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद, किसी दल के सांसदों की स्थिति बदलने का अर्थ यह नहीं है कि वे विधेयक के पक्ष में मतदान भी करेंगे। सरकार को दोनों सदनों में जरूरी समर्थन सुनिश्चित करना होगा।

महिला आरक्षण लागू करने की क्या है योजना?

साल 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए करीब एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। इसके लागू होने को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया था।

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सरकार का नया प्रस्ताव इस प्रक्रिया में बदलाव कर महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार करना चाहता है। परिसीमन के जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों का आवंटन तय होगा। इसी वजह से यह मुद्दा केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के बीच संसदीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। विशेष सत्र बुलाया जाता है तो विधेयकों को दोबारा पेश करने के साथ-साथ सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती दोनों सदनों में जरूरी समर्थन जुटाना होगी।

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