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लखनऊ में चल रहा था 200 करोड़ का इंटरनेशनल साइबर स्कैम, कोलकाता से पकड़ा गया 5वीं फेल मास्टरमाइंड और उसकी गर्लफ्रेंड

त्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग से विदेशियों को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है। इस हाईटेक ठगी नेटवर्क से जुड़ा एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान है। दरअसल महज एक साल के भीतर करीब 200 करोड़ रुपए की...

By Harsh Gautam 
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग से विदेशियों को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है। इस हाईटेक ठगी नेटवर्क से जुड़ा एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान है। दरअसल महज एक साल के भीतर करीब 200 करोड़ रुपए की अंतरराष्ट्रीय ठगी करने वाले इस गिरोह के मुख्य सरगना का पार्टनर सिर्फ 5वीं फेल है। इस शातिर गिरोह ने समिट बिल्डिंग के दो बड़े हिस्सों को करीब 3 करोड़ रुपए सालाना के भारी-भरकम किराए पर ले रखा था। यहां 119 लड़के-लड़कियों का पूरा स्टाफ बैठकर दिन-रात विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस ने इस मामले में 2 जुलाई को ही पूरे स्टाफ को दबोच लिया था, लेकिन अब कोलकाता के एक आलीशान रिसॉर्ट से इस गिरोह के मुख्य सरगना विनीत वशिष्ठ, उसकी गर्लफ्रेंड रिंकी दास गुप्ता और 5वीं फेल पार्टनर नायकर जयराज को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

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महंगे मोबाइल का मोह पड़ा भारी और शिकंजे में आ गया गिरोह

कॉल सेंटर पर पुलिस का छापा पड़ने के बाद मुख्य आरोपी विनीत, जयराज और रिंकी लखनऊ छोड़कर भाग निकले थे। पुलिस से बचने के लिए विनीत और जयराज ने रास्ते में अपने मोबाइल फोन नदी में फेंक दिए ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। लेकिन विनीत की गर्लफ्रेंड रिंकी दास गुप्ता को अपना महंगा आईफोन फेंकना मंजूर नहीं था। उसने चालाकी दिखाते हुए सिर्फ अपना पुराना सिम कार्ड नदी में फेंका और मोबाइल अपने पास रख लिया। कोलकाता पहुंचकर उसने उसी महंगे फोन में नया सिम कार्ड डाला और छिपने के लिए एक रिसॉर्ट बुक किया। रिंकी की इसी एक गलती से पुलिस को उनकी सटीक लोकेशन मिल गई और सर्विलांस टीम की मदद से तीनों को बुधवार को दबोच लिया गया। पुलिस ने इनके पास से एक आईपैड, दो आईफोन और नगदी बरामद की है।

कम पढ़े-लिखे शातिरों ने बिछाया था हवाला का पूरा जाल

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पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के इन मुख्य किरदारों में से कोई भी 10वीं पास तक नहीं है। पार्टनर जयराज ने 5वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि रिंकी सिर्फ 9वीं तक पढ़ी है। विनीत की डिग्री का भी कोई अता-पता नहीं है। इतने कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद इनका नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। अहमदाबाद में रियल एस्टेट का धंधा करने वाला विनीत इस अवैध कॉल सेंटर में पैसा लगाता था। जयराज के नाम पर ऑफिस का रेंट एग्रीमेंट था जिसके बदले उसे मोटा कमीशन मिलता था। वहीं विनीत की गर्लफ्रेंड रिंकी, जिसका कोलकाता में सैलून और एक बार है ठगी की इस काली कमाई को देश और विदेश में हवाला के जरिए सेटल करने का पूरा काम देखती थी।

कौन है रहस्यमयी ‘चार्ल्स’ जो पर्दे के पीछे से चला रहा था खेल

इस पूरे सिंडिकेट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस 200 करोड़ के साम्राज्य को पीछे से ऑपरेट करने वाला असली मास्टरमाइंड ‘चार्ल्स’ नाम का एक शख्स है। हैरानी की बात यह है कि लखनऊ में बैठकर इतना बड़ा नेटवर्क चलाने वाले विनीत, जयराज या रिंकी में से आज तक कोई भी चार्ल्स से आमने-सामने नहीं मिला। चार्ल्स सिर्फ व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए विनीत को निर्देश देता था और इंडिया की टीम उसे आंख बंद करके फॉलो करती थी। एक विशेष ‘वेंडर’ व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए विदेशियों के नंबर और कूपन कोड शेयर किए जाते थे, जिन्हें स्क्रैच करके लखनऊ की टीम भुनाती थी। फिलहाल एडीसीपी क्राइम किरण यादव के मुताबिक पुलिस की टीमें इस गिरोह के बाकी बचे मददगारों और इस रहस्यमयी चार्ल्स की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।

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