चुनाव आयोग (Election Commission) को लेकर देश में सत्तापक्ष व विपक्ष की बीच जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पद्म विभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी (Padma Vibhushan Dr. Murli Manohar Joshi) ने लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर दिया है।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग (Election Commission) को लेकर देश में सत्तापक्ष व विपक्ष की बीच जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पद्म विभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी (Padma Vibhushan Dr. Murli Manohar Joshi) ने लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर दिया है। मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद इस बात पर टिकी है कि चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों और नौकरशाही पारदर्शी तरीके से काम करे।
मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद पर मुरली मनोहर जोशी को सुनिए… https://t.co/J2jnTpcHiz
— Romita Tiwari (@romita_tiwari) October 8, 2026
मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने कहा कि जनता द्वारा, जनता के लिए और जनता की सरकार तभी कायम रह सकती है, जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन सिद्धांतों का पालन हो। ECI से जुड़े विवाद पर मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अगर संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को उस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर ही काम करना चाहिए।
विपक्ष संवेदनशील और जिम्मेदार हो
बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विपक्ष संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए और उसके पास जनता के सामने रखने के लिए स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक गतिविधियां संविधान के दायरे में रहकर होनी चाहिए।
जोशी छात्रों के प्रदर्शन पर भी बोले
दिल्ली में चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में छात्र संगठन भी शामिल हैं। ऐसे में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने कहा कि छात्रों की जायज मांगों को हमेशा सुना जाना चाहिए और पूरी सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने लाठीचार्ज के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सही तरीका नहीं है, किसी समस्या का समाधान लाठीचार्ज से नहीं निकल सकता। अगर छात्रों की कोई समस्या है तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए।