कोलकाता के सुरुची संघ दुर्गा पूजा पंडाल में महिला वॉलंटियर्स के साथ एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर ने बदसलूकी की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ASI को गिरफ्तार कर लिया है।
Kolkata Police: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक पुलिसकर्मी की कथित हरकत ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के प्रसिद्ध सुरुची संघ दुर्गा पूजा पंडाल में ड्यूटी पर तैनात एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) पर महिला वॉलंटियर्स को अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगा है।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई, जब दुर्गा पूजा पंडाल में महिला वॉलंटियर्स मौजूद थीं। आरोप है कि वहां तैनात हथियारबंद ASI ने एक महिला वॉलंटियर के साथ अनुचित व्यवहार किया। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी महिला के कंधे पर गंदी तरीके से हाथ रखता दिखाई देता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बेहद नाराजगी जताई जा रही है।
An Assistant Sub-Inspector deployed on duty at Suruchi Sangha Durga Puja pandal was seen inappropriately touching a lady volunteer. The ASI has been arrested and legal action initiated.
(Faces blurred) https://t.co/jF1RFd8Kvc
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— Pooja Mehta (@pooja_news) October 19, 2026
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल के सबसे प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में पहुंचते हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है। ऐसे में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारी पर ही इस तरह के आरोप लगना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सामने आने के बाद कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी ASI को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। हालांकि, आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
इस बीच सुरुची संघ का दुर्गा पूजा पंडाल अपनी विशेष थीम को लेकर भी चर्चा में है। इस साल पंडाल की थीम जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आधारित बताई गई है। सजावट के माध्यम से उनके जीवन और राजनीतिक विरासत को दर्शाने का प्रयास किया गया है।
घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक आयोजनों में महिलाओं की सुरक्षा और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।