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Bada Mangal Jyeshtha Month 2026 : ज्येष्ठ माह में बड़े मंगल का अद्भुत है पौराणिक रहस्य, जानें पूरी कहानी

ज्येष्ठ माह को हनुमान जी की सेवापूजा के लिए समर्पित माना जाता है। इस माह में पड़ने वाले मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहने के पीछे कई महत्वपूर्ण पौराणिक और ऐतिहासिक रहस्य छिपे हैं।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Bada Mangal Jyeshtha Month 2026 : ज्येष्ठ माह को हनुमान जी की सेवापूजा के लिए समर्पित माना जाता है। इस माह में पड़ने वाले मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहने के पीछे कई महत्वपूर्ण पौराणिक और ऐतिहासिक रहस्य छिपे हैं। मुख्य रूप से यह दिन भगवान हनुमान की अपार शक्ति, सेवा और उनके वृद्ध स्वरूप की पूजा को समर्पित है।

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ऋष्यमूक पर्वत
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही प्रभु श्रीराम की मुलाकात पहली बार हनुमान जी से ऋष्यमूक पर्वत पर हुई थी। इसी पावन संयोग के कारण ज्येष्ठ के सभी मंगलवार हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।

भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month 2026) का प्रारंभ 2 मई 2026 से हो रहा है और यह 29 जून 2026 को समाप्त होगा। अधिक मास (Adhik Maas) के संयोग से यह माह लगभग 59 दिनों का होगा, जो सामान्य से लंबा है। इसमें 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिक मास चलेगा। यह महीना भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

लखनऊ में बड़ा मंगल और इस अवसर पर होने वाले भण्डारे की परंपरा लगभग 400 साल पुरानी है। यह न केवल धार्मिक श्रद्धा बल्कि अवध की “गंगा-जमुनी तहजीब” (साझा संस्कृति) का भी एक बड़ा प्रतीक है।

नवाब की बेगम और मन्नत की कहानी
बड़ा मंगल भण्डारे के पीछे की कहानी में सबसे लोकप्रिय मान्यता अवध के तीसरे नवाब शुजाउद्दौला की पत्नी बेगम मल्लिका आलिया से जुड़ी है। कहा जाता है कि बेगम की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगी थी। जब उन्हें पुत्र (नवाब सआदत अली खान) रत्न की प्राप्ति हुई, तो उन्होंने कृतज्ञता स्वरूप ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवारों को लोगो के लिए बड़े स्तर पर खाने-पीने और पानी का इंतजाम करवाया। यहीं से भण्डारे की नींव पड़ी।

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केसर व्यापारियों की कथा
हनुमान जी अपार शक्ति की एक अन्य कहानी के अनुसार, केसर बेचने आए कुछ व्यापारियों का माल बिक नहीं रहा था। उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना की और बाद में नवाब वाजिद अली शाह ने उनका सारा केसर खरीद लिया। इस खुशी में व्यापारियों ने ज्येष्ठ के मंगलवार को भण्डारा आयोजित किया।

हाथी और मन्नत
कहा जाता है कि जहां वर्तमान अलीगंज हनुमान मंदिर है, वहां एक हाथी हनुमान जी की मूर्ति लेकर आकर रुक गया था और आगे नहीं बढ़ा, जिसके बाद वहीं मंदिर स्थापित किया गया।

 

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