धीरेंद्र शास्त्री की सागर पहुंची सनातन हिंदू एकता यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यात्रा के दौरान सनातन समाज की एकता, लव जिहाद और जेन-जी आंदोलन जैसे मुद्दों पर उनके बयान चर्चा में रहे। खास तौर पर बुर्के को लेकर की गई टिप्पणी ने सामाजिक बहस को जन्म दिया है।
Madhya Pradesh: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता यात्रा मध्य प्रदेश के सागर पहुंच गई। देर रात शहर में पहुंची यात्रा का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को भी हवा दे दी।
सागर में मीडिया से बातचीत के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज को एकजुट करना है। उन्होंने ‘एक रहेंगे, नेक रहेंगे और सेफ रहेंगे’ का संदेश देते हुए आपसी एकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक, इस बार यात्रा के जरिए अधिक लोगों से सीधे संवाद करने का अवसर मिल रहा है।
लव जिहाद के मुद्दे पर बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने युवतियों को सोशल मीडिया के आकर्षण और रील के प्रभाव में आकर फैसले नहीं लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर बिना सोचे-समझे भरोसा नहीं करना चाहिए।
दुर्गा बनो, काली बनो पर कभी बुर्के वाली मत बनना…
पंडित धीरेंद्र शास्त्री https://t.co/9jVhC0ZWL5
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— Romita Tiwari (@romita_tiwari) October 13, 2026
इसी दौरान उन्होंने कहा, “बेटियों, दुर्गा बनो, काली बनो, लेकिन कभी बुर्केवाली मत बनो।” उनके इस बयान पर समर्थकों की प्रतिक्रिया सामने आई, वहीं इस टिप्पणी को लेकर नाराजगी भी जताई गई। बयान को लेकर बहस का केंद्र धार्मिक पहचान और महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद का सवाल बन गया है।
युवाओं के आंदोलनों से जुड़े सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जेन-जी को अपनी बात रखने और आंदोलन करने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी अपील की कि विरोध प्रदर्शन के दौरान देश की छवि को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने पर जोर दिया।