हम बात कर रहे हैं एक ऐसे जिले की जो सभी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है- सीतापुर। नैमिषारण्य की धार्मिक पहचान से लेकर किसानों के मुद्दों तक, गन्ने की खेती से लेकर रोजगार और कानून-व्यवस्था तक, सीतापुर की राजनीति कई अलग-अलग सवालों से होकर गुजरती है। और अब जब 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है, तो बड़ा सवाल है- 9 विधानसभा सीटों वाले इस जिले में किसका दबदबा कायम रहेगा और कौन अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में कामयाब होगा?
Sitapur: ऐतिहासिक रूप से सीतापुर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस का मजबूत जनाधार देखने को मिला है।जैसा की सीतापुर जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं- महोली, सीतापुर सदर, हरगांव, लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद, सिधौली और मिश्रिख। इनमें हरगांव, सिधौली और मिश्रिख सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।
अगर 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी हद तक साफ दिखाई देती है। सीतापुर की 9 में से 8 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जबकि सिर्फ लहरपुर सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। यानी 2022 में सीतापुर में बीजेपी का दबदबा साफ दिखाई दिया।
महोली से बीजेपी के शशांक त्रिवेदी जीते, सीतापुर सदर में राकेश राठौर ‘गुरु’ ने जीत दर्ज की, हरगांव सुरक्षित सीट से सुरेश राही विजयी रहे। लहरपुर में समाजवादी पार्टी के अनिल कुमार वर्मा ने बीजेपी के वर्चस्व को रोकते हुए जीत हासिल की। वहीं बिसवां से निर्मल वर्मा, सेवता से ज्ञान तिवारी, महमूदाबाद से आशा मौर्य, सिधौली से मनीष रावत और मिश्रिख से राम कृष्ण भार्गव ने बीजेपी के लिए जीत दर्ज की।
लेकिन 2027 की लड़ाई सिर्फ 2022 के आंकड़ों से तय नहीं होगी, क्योंकि सीतापुर की राजनीति में स्थानीय मुद्दे बेहद अहम हैं। किसानों के लिए फसल और गन्ने का भुगतान बड़ा सवाल है- ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं चुनावी मुद्दा बन सकती हैं। वहीं युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा भी सियासी बहस के केंद्र में रहेंगे। इसके अलावा नैमिषारण्य का विकास भी सीतापुर की राजनीति का बड़ा मुद्दा है। धार्मिक पर्यटन से लेकर स्थानीय कारोबार तक, नैमिषारण्य के विकास का असर जिले की अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जुड़ा हुआ है।
वहीं सीतापुर की सामाजिक संरचना भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले में हिंदू आबादी करीब 79.29 फीसदी है, जिसकी अनुमानित संख्या 35 लाख 55 हजार 450 है। वहीं मुस्लिम आबादी 19.93 फीसदी यानी करीब 8 लाख 93 हजार 725 है। इसके अलावा सिख समुदाय की आबादी 0.26 फीसदी, ईसाई 0.15 फीसदी, बौद्ध 0.06 फीसदी और जैन समुदाय की आबादी करीब 0.03 फीसदी है। ऐसे में गांवों के मुद्दे और स्थानीय सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।