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BRICS पर कांग्रेस में दो राय, चिदंबरम ने पूछा- भारत को इससे क्या मिला? थरूर ने गिनाए कूटनीतिक फायदे

नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन से पहले कांग्रेस के भीतर ही इस समूह को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इनसे देश को कितना ठोस फायदा मिला है...

By Harsh 
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डिजिटल डेस्क, पर्दाफाश।  नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन से पहले कांग्रेस के भीतर ही इस समूह को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इनसे देश को कितना ठोस फायदा मिला है। वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को भारत के लिए अहम मंच बताते हुए सम्मेलन की मेजबानी के कई फायदे गिनाए।

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12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट होने जा रहा है। भारत इस बार समूह की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे बैठक के केंद्र में रहेंगे।

थरूर ने कहा कि भारत में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अपने आप में देश की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका का संकेत है। उनका कहना है कि 11 देशों के प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाना भारत की अलग-अलग देशों को साथ लेकर चलने की क्षमता दिखाता है। उन्होंने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि इसके सदस्य देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि थरूर ने समूह के सामने मौजूद चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया।

उन्होंने बताया कि BRICS के सभी देशों के हित और विदेश नीतियां समान नहीं हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद भी सामने आ चुके हैं। मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में साझा बयान जारी न हो पाना इसका उदाहरण है। ऐसे में आगामी शिखर सम्मेलन में किसी बड़े मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो समूह की एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं।

भारत के लिए व्यापार संतुलन भी एक चुनौती है। BRICS देशों से भारत का आयात उसके निर्यात की तुलना में अधिक है। यानी समूह के देशों से भारत ज्यादा सामान खरीदता है, जबकि वहां भारतीय निर्यात अपेक्षाकृत कम है।

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चिदंबरम ने उठाया सवाल, BJP ने साधा निशाना

पी. चिदंबरम ने बुधवार को BRICS के साथ-साथ G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए पूछा था कि इन संगठनों की सदस्यता से देश को वास्तविक रूप से क्या हासिल हुआ है। उन्होंने इन संगठनों की सदस्यता को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

चिदंबरम के बयान पर BJP ने पलटवार करते हुए उन्हें ऐसे ‘नाराज फूफा’ की श्रेणी में बताया जो भारत की प्रगति को पचा नहीं सकते।

भारत के लिए BRICS क्यों अहम?

BRICS की शुरुआत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मंच के तौर पर हुई थी। मौजूदा समूह में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को नई दिल्ली की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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