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Chaitra Navratri 2024 : चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन करें माता कूष्मांडा की पूजा , दही और हलवा का भोग लगाएं

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। माता के चौथे रूप में मां कुष्मांडा भक्तों को रोग, शोक, विनाश से मुक्‍त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Chaitra Navratri 2024 : नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। माता के चौथे रूप में मां कुष्मांडा भक्तों को रोग, शोक, विनाश से मुक्‍त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं। भगवती पुराण में बताया गया है कि देवी कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्‍पन्‍न किया था, इसलिए इनका नाम कुष्मांडा पड़ा। माना जाता है जब सृष्टि के आरंभ से पहले चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था। ऐसे में मां ने अपनी हल्‍की सी हंसी से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। वह सूरज के घेरे में रहती हैं और उन्हीं के अंदर इतनी शक्ति है कि वह सूरज की तपिश को सह सकती हैं।

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मां कुष्मांडा की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठें। स्नान  के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और घर का मंदिर साफ करें। इसके बाद मां दुर्गा के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें धूप, दीप, फल,फूल, सिंदूर, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।

पीले फूल चढ़ाएं
इस पूजन के लिए पीले फल अर्पित करें, पीले ही फूल चढ़ाएं, पीला वस्त्र भी माता को भेंट करें। क्योंकि यह रंग मां को बहुत प्रिय है। वहीं, मां कुष्मांडा का प्रिय भोग मालपुआ है, जिसे बनाकर मां के चरणों में अर्पित करें।

दही और हलवा का भोग
भोजन में दही और हलवा का भोग लगाएं। इसके बाद उन्हें फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। इससे मां कूष्मांडा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

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