यूपी में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) में टंकियों के निर्माण में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में चीफ इंजीनियर डीके सिंह (Chief Engineer DK Singh) की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
लखनऊ। यूपी में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) में टंकियों के निर्माण में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में चीफ इंजीनियर डीके सिंह (Chief Engineer DK Singh) की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED) इसके कारनामों की जांच करता है, तो वित्तीय अनियमितताओं, ठेकों और भुगतान से जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।
ईडी सही जांच करना चाहती है तो डीके सिंह व उनके ड्राइवर की सीडीआर निकाल के देख ले!
प्रदेश में जल जीवन मिशन के टंकियों के निर्माण में भ्रष्टाचार जांच ईडी कर रही है। इसमे गौर करने वाली बात यह है कि दर्जनों टंकियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। अब इसमें गौर करने वाली बात यह है कि जल जीवन मिशन के चीफ इंजीनियर डीके सिंह जो कि लघु सिंचाई से डेपुटेशन (Deputation) पर आए थे जल जीवन मिशन में जितना भ्रष्टाचार हो रहा है जिसकी तमाम भाजपा विधायक, सांसद व विपक्षी दल की नेताओं ने शिकायत भी की, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद इस अधिकारी का अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। हमारे सूत्र बताते हैं कि यदि ईडी सही जांच करना चाहती है तो डीके सिंह व उनके ड्राइवर की सीडीआर निकाल के देख ले,जल जीवन मिशन में काम करने वाली सभी कंपनियों से वसूली का मेन किरदार डीके सिंह है और वसूली सैंकड़ों नहीं हजारों करोड़ की हो रही है, अब सबसे बड़ा सवाल यह है क्या जांच एजेंसी ऐसा कर पाएगी?
शिकायत के बाद भी कंपनी पर न कोई FIR,ब्लैकलिस्टिंग और न ही किसी इंजीनियर पर एक्शन
यूपी में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत बन रही पानी की टंकियों की टूटने व गुणवत्ताविहीन होने की शिकायत रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब बिजनौर जिले (Bijnor District) के हल्दौर विकासखंड (Haldaur Block) की ग्राम पंचायत गंगोरा शेख (Gangora Sheikh Gram Panchayat) में निर्माणाधीन पानी की टंकी क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि क्षतिग्रस्त टंकी की तस्वीरें स्थानीय ग्रामीणों ने वायरल की हैं। शिकायत के बाद भी कंपनी पर कोई FIR,ब्लैकलिस्टिंग और किसी इंजीनियर पर एक्शन नहीं हुआ। अभी पानी टंकी इस्तेमाल भी नहीं हुई उसके पहले टूट रही है। गुणवत्ता के नाम पर इस तरह का भ्रष्टाचार सामने आया है।
सवाल ये है कार्रवाई की फाइल आखिर किस टंकी में डुबो दी गई ?
अब सवाल उठता है कि उत्तर प्रदेश में जल मिशन तहत बन रही टंकियों की यह हालत है, तो काम की गुणवत्ता का अंदाज़ा अपने आप लगाया जा सकता है। जनता के पैसे से हो रहे काम मे ऐसी लापरवाही आखिर कब तक चलेगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सवाल ये है की टंकी बनाने वालों की जवाबदेही कौन तय करेगा? गुणवत्ता जांचने वाले क्या कर रहे थे? और कार्रवाई की फाइल आखिर किस टंकी में डुबो दी गई ?